📅 Published on: April 21, 2024
नीम हकीम खतरें जानकी तर्ज पर धड़ल्ले से चल रहें हैं क्लीनिक व पैथोलॉजी सेंटर पैथोलोजी सेंटरों के बाहर यदि कोई सूचना दिख भी जाती है तो जिसके नाम से लाइसेंस होता है वह कहीं दूर नौकरी कर रहा होता है यही नहीं एक योग्य व्यक्ति के नाम पर दो दो तीन लैब भी संचालित होने की सूचना है जिसकी जाँच होना आवश्यक है |
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सिद्धार्थनगर जिले के अधिकांशतः चैराहों पर छोटे छोटे अल्टरनेटिव डिग्री लेकर जगह- जगह दुकान की तरह क्लीनिक, पैथोलॉजी खोलकर उसका संचालन फर्जी तरीके से कर ग्रामीण मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है|
बताते चलें कि बिना रजिस्ट्रेशन और सर्टिफिकेट के बेखौफ फर्जी झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा क्लीनिक और पैथोलॉजी लैब के नाम पर गरीब ग्रामीणों को लूटने का कार्य चल रहा है |
लंबे अरसे से क्लीनिक और पैथोलॉजी के नाम पर झोलाछाप डॉक्टर द्वारा ग्रामीणों की तबीयत सेखिलवाड़ किया जाता है। झोलाछाप डॉक्टर के द्वारा एलोपैथिक इलाज किया जाता है वही पैथोलॉजी में बिना पैथोलॉजिस्ट के मरीजों के खून पेशाब और अन्य प्रकार की जांच की जा रही हैं |
साथ ही लंबा बिल बना कर गरीब ग्रामीण को लूटने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं बात दे कि सभी तहसील क्षेत्रों में इनका जाल बिझा हुवा है अधिकतर लैब बिना पंजीयन के संचालित हो रही हैं।
लेकिन इनका संचालन रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग गंभीर नहीं है। इन पैथालॉजी लैब का स्वास्थ्य विभाग में पंजीयन भी नहीं है। जबकि नर्सिंग होम एक्ट के तहत विभाग में लैब का पंजीयन होना जरूरी है।
लेकिन अवैध तरीके चल रहे पैथोलॉजी सेंटर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। वहीं ब्लड कलेक्शन की आड़ में इन पैथोलॉजी में सभी प्रकार की जांचें की जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा ठोस कदम नहीं उठाए जाने से लैब सेंटर मालिकों के हौंसले बुलंद हैं।