📅 Published on: February 3, 2025
आदरणीय रामनगीना सिंह गुरुजी का ज्ञान और समर्पण आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा। गणित विषय के माहिर थे उनकी ख्याति और शिक्षण शैली के कारण नेपाल सहित कई जिलों से विद्द्यार्थी पढने आते थे | राजा योगेन्द्र प्रताप सिंह [ प्रबंधक ]
डेमोक्रेट / परमात्मा उपाध्याय
शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर: गणित विषय के प्रतिष्ठित शिक्षक रामनगीना सिंह के निधन की खबर से शिक्षा जगत में शोक की लहर दौड़ गई। वह शिवपति इंटर कॉलेज, शोहरतगढ़ में एक समर्पित शिक्षक के रूप में कार्यरत थे और अपने ज्ञान व सादगी के लिए जाने जाते थे।
उनके निधन की सूचना मिलते ही स्कूल प्रशासन, छात्र-छात्राएं और स्थानीय लोग उनके घर पहुंचे और परिवार को सांत्वना दी। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
कॉलेज के प्रधानाचार्य विक्रम यादव ने कहा, रामनगीना सिंह ने गणित को सरल और रोचक बनाने के लिए जीवनभर मेहनत की। उनका जाना विद्यार्थियों के लिए अपूरणीय क्षति है|
गणित के आर्य भट्ट कहे जाते थे गुरु जी – डॉ चंद्रेश उपाध्याय
शिवपति इंटर कॉलेज, शोहरतगढ़ के वरिष्ठ गणित शिक्षक रामनगीना सिंह के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए डॉ. चंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि “गुरुजी केवल शिक्षक नहीं, बल्कि गणित के आर्यभट्ट थे। उनकी विद्वता और शिक्षण शैली ने अनगिनत विद्यार्थियों को गणित में निपुण बनाया।”
डॉ. उपाध्याय ने कहा कि रामनगीना सिंह का योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने छात्रों को गणित के जटिल सिद्धांतों को सरल और रोचक तरीके से समझाने की कला विकसित की थी। उनके पढ़ाए हुए छात्र आज विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर रहे हैं।

गणित जगत में उनकी योगदान को सदैव याद रखा जाएगा – प्राचार्य अरविंद प्रताप सिंह
वरिष्ठ गणित शिक्षक रामनगीना सिंह के निधन पर शिवपति स्नातकोत्तर महाविद्यालय, शोहरतगढ़ के प्राचार्य अरविंद प्रताप सिंह ने गहरा दुख व्यक्त किया।
उन्होंने कहा, “रामनगीना सिंह न केवल गणित के महान शिक्षक थे, बल्कि वे विद्यार्थियों के मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत भी थे। उनके पढ़ाए छात्र आज उच्च पदों पर कार्यरत हैं। उनकी शिक्षण शैली और समर्पण अपूरणीय था।”
गुरु जी ने ज्ञान की जो शमा जलाई, वह सदैव जलती रहेगी – व्यापारी नेता सिद्धार्थ अग्रवाल
शोहरतगढ़ स्थित शिवपति इंटर कॉलेज शोहरतगढ़ के गणित के प्रख्यात शिक्षक रामनगीना सिंह के निधन पर जनपद के सफल व्यवसायी एवं व्यापारी नेता सिद्धार्थ अग्रवाल ने गहरा शोक व्यक्त किया।
उन्होंने कहा, गुरु जी [रामनगीना सिंह] केवल शिक्षक नहीं थे, बल्कि शिक्षा के मंदिर के सच्चे दीपक थे। उन्होंने न सिर्फ विद्यार्थियों को गणित सिखाया, बल्कि उन्हें जीवन के मूल्यों की भी शिक्षा दी। उनका जाना पूरे समाज के लिए अपूरणीय क्षति है।”
गुरु जी भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच न हों, लेकिन उनका ज्ञान, उनके विचार और उनका शिक्षण हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगा – दीपक कौशल मानव अधिकार नगर अध्यक्ष
उन्होंने आगे कहा, “एक शिक्षक केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता, वह समाज का मार्गदर्शक भी होता है। रामनगीना सिंह ने अपने कार्यों से यह साबित किया कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह जीवन को संवारने का माध्यम भी है।”
व्यापारी समुदाय और स्थानीय नागरिकों ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। नगर में श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जा रहा है, जहां उनके योगदान को याद किया जा रहा है। विद्यालय और क्षेत्र के शिक्षकों, छात्रों व गणमान्य लोगों ने उनके निधन को शिक्षा जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया और श्रद्धांजलि अर्पित की।