बांसी ब्लॉक में भ्रष्टाचार का बोलबाला: मंझरिया ग्राम पंचायत का सामुदायिक शौचालय बना दिखावे का प्रोजेक्ट

नवरंगी यादव

​मिश्रैलिया सिद्धार्थनगर: सरकार की महत्वपूर्ण सामुदायिक शौचालय योजना, जिसे गाँवों में स्वच्छता लाने के लिए शुरू किया गया था, बांसी ब्लॉक के मंझरिया ग्राम पंचायत में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही है। इस योजना के तहत बना सामुदायिक शौचालय बदहाली की ऐसी मिसाल बन गया है कि इसे “हाथी के दाँत” की तरह केवल दिखावे का प्रोजेक्ट कहा जा रहा है।

पत्रकार नवरंगी यादव की रिपोर्ट के अनुसार, वर्षों से एक ही पद पर जमे एडीओ पंचायत अजय राय और ब्लॉक अधिकारियों की मिलीभगत और कथित भ्रष्टाचार के कारण, शौचालय की हालत बेहद खराब है।

शौचालय की बदहाल स्थिति

​सामुदायिक शौचालय के चारों ओर घनी झाड़ियाँ उग आई हैं, और वहाँ तक पहुँचने का कोई रास्ता नहीं है। बारिश के बाद कीचड़ और गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिससे वहाँ जाना लगभग नामुमकिन है। शौचालय के गेट टूटे हुए हैं और पानी की टंकी भी अपनी दुर्दशा बयां कर रही है। यह पूरा ढाँचा भ्रष्टाचार और अधिकारियों की लापरवाही की जीती-जागती मिसाल है।

पूरे गाँव में गंदगी का साम्राज्य

​यह समस्या सिर्फ शौचालय तक सीमित नहीं है। गाँव की गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर भी गंदगी का ढेर लगा हुआ है। हालात इतने खराब हैं कि ग्रामीणों को मुंह पर रुमाल रखकर चलना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी सिर्फ कागजों में विकास दिखा रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

एडीओ पंचायत पर लगे गंभीर आरोप

​सूत्रों की मानें तो, एडीओ पंचायत अजय राय, जो स्थानीय निवासी भी हैं, अपने पद का गलत फायदा उठा रहे हैं। ब्लॉक के बड़े अधिकारियों का संरक्षण मिलने के कारण उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों की योजनाएँ आती हैं, लेकिन पारदर्शिता की कमी और कर्मचारियों की लापरवाही से विकास कार्य अधूरे रह जाते हैं।

उठ रहे हैं गंभीर सवाल

​यह पूरा मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है:

  • आखिर क्यों बांसी ब्लॉक के पंचायत विभाग में तमाम भ्रष्टाचार के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है?

  • क्या सरकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक कभी पहुँचेगा, या फिर विकास की कहानी सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेगी?

  • कब तक जनता के पैसों की बंदरबांट होती रहेगी और जिम्मेदार अधिकारी मौन रहेंगे?

​यह देखना बाकी है कि इस खबर के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है और कब मंझरिया गाँव की जनता को इस बदहाली से मुक्ति मिलती है।