आशा बहू के चंगुल और प्राइवेट अस्पताल की लूट ने ली प्रसूता की जान, परिजनों ने लगाई न्याय की गुहार सीएचसी अधीक्षक की जानकारी में था पूरा मामला, फिर भी नहीं हुई कोई कार्रवाई; अब थाने पहुंची पीड़िता

Crime reporter 
जनपद के शोहरतगढ़ क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। एक आशा कार्यकत्री और निजी अस्पताल के कथित गठजोड़ के कारण एक गरीब परिवार की बहू को अपनी जान गंवानी पड़ी। पीड़िता विमला देवी ने शोहरतगढ़ थानाध्यक्ष नवीन कुमार सिंह को तहरीर देकर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

सरकारी अस्पताल से डराकर प्राइवेट ले गई आशा बहू
पीड़िता विमला देवी (निवासी ग्राम पंचायत हलौरा) के अनुसार, वह अपनी बहू सावित्री (पत्नी राजेश पासवान) को प्रसव के लिए 1 दिसंबर 2025 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) शोहरतगढ़ ले गई थीं। वहां तैनात आशा कार्यकत्री रेनू ने परिजनों को यह कहकर डरा दिया कि ‘मरीज में खून की कमी है और सरकारी अस्पताल में कुछ भी अनहोनी हो सकती है।’ आशा ने निजी अस्पताल में बेहतर सुविधाओं का लालच देकर जबरन उन्हें ‘जनहित हॉस्पिटल एण्ड फैक्चर क्लीनिक’ भेज दिया।

जबरिया ऑपरेशन और लापरवाही का आरोप
आरोप है कि निजी अस्पताल में सावित्री का जबरन ऑपरेशन कर दिया गया, जिसके एवज में परिजनों से ऑनलाइन भुगतान भी कराया गया। अगले ही दिन 2 दिसंबर को अस्पताल के संचालक डॉ. अरविंद तिवारी ने मरीज की हालत बिगड़ने (पेशाब रुकने और झटके आने) की बात कहकर उसे आनन-फानन में अपने निजी वाहन से गोरखपुर के एक प्राइवेट अस्पताल भेज दिया।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई मौत
पीड़िता का कहना है कि गोरखपुर के उस निजी अस्पताल में भी तीन दिनों तक केवल ऑक्सीजन मशीन लगाकर खानापूर्ति की गई। बहू की बिगड़ती हालत देख परिजन उसे वापस घर ले आए और फिर पैसे जुटाकर उसे जिला अस्पताल और बाद में बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर ले गए। दुर्भाग्यवश, इलाज के दौरान 16 दिसंबर 2025 को सावित्री ने दम तोड़ दिया।
अधीक्षक की भूमिका पर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के अधीक्षक ए.के. आजाद के संज्ञान में यह पूरा घटनाक्रम शुरू से ही था। आरोप है कि अस्पताल से मरीजों को प्राइवेट क्लिनिक भेजने के खेल की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिससे आशा कार्यकत्री और निजी अस्पतालों के हौसले बुलंद हैं।

न्याय की मांग
बहू के क्रियाकर्म के बाद अब पीड़िता विमला देवी ने न्याय के लिए पुलिस का दरवाजा खटखटाया है।

उन्होंने थानाध्यक्ष से मांग की है कि भ्रामक जानकारी देकर डराने वाली आशा कार्यकत्री रेनू।
लापरवाही बरतने वाले ‘जनहित हॉस्पिटल’ के संचालक डॉ. अरविंद तिवारी।
* और इस प्रकरण में संलिप्त अन्य दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।