Doctor of the Month: डॉ. रूही परवीन के साथ खास चर्चा—क्या बांझपन अब लाइलाज है? जानें सूने आंगन में किलकारी गूंजने का वैज्ञानिक समाधान
📅 Published on: January 14, 2026
एक नव-दंपत्ति के लिए शादी के बाद सबसे हसीन सपना अपने आंगन में नन्ही किलकारियां सुनने का होता है, क्योंकि सही मायने में गृहस्थी की सच्ची खुशी औलाद की मुस्कान से ही पूरी होती है। दुनिया की इस सबसे बड़ी खुशी को हकीकत में बदलने के लिए शोहरतगढ़ का डॉ. अंसारी हॉस्पिटल और डॉ. रूही परवीन एक वरदान साबित हो रहे हैं |
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शोहरतगढ़ (सिद्धार्थनगर): आज के दौर में बदलती जीवनशैली और तनाव के कारण बांझपन (Infertility) एक गंभीर समस्या बनकर उभरा है। ऐसे में सिद्धार्थनगर जिले के शोहरतगढ़ स्थित डॉ. अंसारी हॉस्पिटल की मशहूर स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रूही परवीन नि:संतान दंपत्तियों के लिए आशा की एक नई किरण साबित हो रही हैं। डॉ ऑफ द मंथ में आज हमारे साथ डॉ अंसारी हॉस्पिटल शोहरतगढ़ की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ रूही परवीन से ख़ास बात चीत
डॉ साहब सबसे पहले यह बताएं कि बांझपन क्या है ?
डॉ रूही परवीन बताती है बांझपन , यानी किसी दंपत्ति का गर्भधारण करने और संतान उत्पन्न करने में असमर्थ होना। बांझपन को बिना गर्भनिरोधक के नियमित यौन संबंध बनाने के एक वर्ष के बाद गर्भधारण न कर पाने या गर्भावस्था को जीवित बच्चे के जन्म तक न पहुंचा पाने के रूप में परिभाषित किया जाता है। बांझपन पुरुष या महिला दोनों को प्रभावित कर सकता है और इसके कई कारण हो सकते हैं।
महिलाओं में बंझपन के क्या प्रमुख कारण हैं ?
इंटरव्यू के दौरान डॉ. रूही ने बताया कि बांझपन के लिए केवल महिलाएं ही नहीं, बल्कि कई बार पुरुषों के स्वास्थ्य कारक भी जिम्मेदार होते हैं। प्रमुख कारणों में शामिल हैं:
1 – PCOD/PCOS: महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन के कारण अंडों का सही समय पर न बनना।
2 – फैलोपियन ट्यूब में ब्लॉक: ट्यूब बंद होने के कारण गर्भधारण में समस्या।
3 – एंडोमेट्रियोसिस: गर्भाशय की आंतरिक परत से जुड़ी समस्याएं।
4 – बढ़ती उम्र और तनाव: करियर की भागदौड़ और मानसिक तनाव का प्रजनन क्षमता पर बुरा असर।
5 – खराब जीवनशैली: जंक फूड का अधिक सेवन और व्यायाम की कमी।
कभी कभी ऐसा भी होता है जब महिला की रिपोर्ट्स नॉर्मल हों, फिर भी गर्भधारण न हो, तो क्या करें?
इंटरव्यू के दौरान डॉ. रूही परवीन ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि अक्सर हमारे पास ऐसे मामले आते हैं जहाँ महिला की सभी रिपोर्ट्स (जैसे अल्ट्रासाउंड, ट्यूब टेस्ट और हार्मोन) बिल्कुल नॉर्मल होती हैं, फिर भी वह माँ नहीं बन पातीं। ऐसी स्थिति में निम्नलिखित पहलुओं पर ध्यान देना बहुत जरूरी है:
1. पुरुष बांझपन (Male Infertility):
डॉ. रूही के अनुसार, “नि:संतानता के लगभग आधे मामलों में कारण पुरुष स्वास्थ्य से जुड़ा होता है।” इसमें शुक्राणुओं की संख्या में कमी (Low Sperm Count), उनकी गतिशीलता (Motility) का कम होना या बनावट में खराबी मुख्य कारण हो सकते हैं। इसलिए, दंपत्ति की जांच एक साथ होना जरूरी है।
2. अनएक्सप्लेन्ड इनफर्टिलिटी (Unexplained Infertility):
लगभग 10-15% मामलों में पति-पत्नी दोनों की रिपोर्ट नॉर्मल आती है, फिर भी गर्भधारण नहीं होता। इसका कारण अंडे और शुक्राणु का सही मिलन न होना या निषेचन (Fertilization) में कोई सूक्ष्म तकनीकी बाधा हो सकती है।
3. गर्भाशय का वातावरण:
कभी-कभी रिपोर्ट्स में सब ठीक दिखता है, लेकिन गर्भाशय की आंतरिक परत (Endometrium) भ्रूण को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं होती।
4. तनाव और मानसिक अवरोध:
अत्यधिक तनाव शरीर के भीतर ऐसे बायोकेमिकल बदलाव लाता है जो गर्भधारण की प्रक्रिया को बाधित कर देते हैं।
एक दंपत्ति जो अपने बच्चे को इस दुनिया में देखना चाहता है तो उसके लिए यह प्राउड मोमेंट्स कैसे संभव है ?
डॉ रूही परवीन कहती हैं इलाज के दौरान हमारी पूरी कोशिश होती है हम हसबैंड और वाइफ दोनों के ही रिपोर्ट्स निकालते हैं दोनों को ही दवाओं , फिजिकल फिटनेस के सहारे गर्भधारण प्रक्रिया तक पहुँचाते है और यही नहीं इलाज के दौरान गर्भ में पल रहे बेबी की भी निगरानी पूरे नौ महीने या यूँ कहें बच्चे के जन्म तक करनी पड़ती है पर पेशेंट को इलाज के दौरान बहुत धैर्य रखने की जरूरत है |
आधुनिक तकनीक और अनुभव का संगम
डॉ. अंसारी हॉस्पिटल अपनी उन्नत चिकित्सा सुविधाओं और डॉ. रूही परवीन के कुशल मार्गदर्शन के लिए पूरे क्षेत्र में जाना जाता है। डॉ. रूही परवीन, जो अपनी संवेदनशीलता और सटीक निदान (Diagnosis) के लिए मशहूर हैं, बांझपन से जूझ रही महिलाओं का न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक उपचार भी करती हैं।
अस्पताल में बांझपन के कारणों का पता लगाने के लिए अत्याधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं। डॉ. रूही परवीन के अनुसार, “बांझपन अब लाइलाज नहीं है। सही समय पर परामर्श और आधुनिक चिकित्सा पद्धति से अधिकांश मामलों में गर्भधारण संभव है।
सटीक परामर्श: मरीज़ की मेडिकल हिस्ट्री का गहराई से अध्ययन।
जटिल केसों का समाधान: पीसीओडी (PCOD), हार्मोनल असंतुलन और बार-बार होने वाले गर्भपात जैसे मामलों में उच्च सफलता दर।
किफायती इलाज: ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के मरीजों के लिए उच्च स्तरीय इलाज को बजट के भीतर उपलब्ध कराना।





