📅 Published on: April 7, 2026
kapilvastupost
बढ़नी (सिद्धार्थनगर): सरकार की ‘ग्राम स्वराज’ की परिकल्पना विकास खंड बढ़नी के गांवों में दम तोड़ती नजर आ रही है। ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए बनाए गए पंचायत भवन आज या तो खंडहर में तब्दील हो चुके हैं या उन पर रसूखदारों का कब्जा है। ताजा मामला मटियार उर्फ भुतहवा ग्राम पंचायत का है, जहाँ सरकारी भवन को ही आवास बना दिया गया है।
सोफे और बेड से सुसज्जित है सरकारी भवन
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत मटियार उर्फ भुतहवा में स्थित पंचायत भवन पर कुछ दबंगों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। जनहित के कार्यों के लिए बना यह भवन अब निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल हो रहा है। यहाँ दबंगों ने बकायदा बेड और सोफा सेट डाल रखा है और इसका उपयोग आवासीय परिसर के रूप में किया जा रहा है।
अधिकारियों की उदासीनता, कागजों पर विकास
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सचिव उदय प्रताप गौतम और ग्राम प्रधान चुल्हई की उदासीनता के कारण सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग हो रहा है। विकास कार्यों को केवल कागजी घोड़ों तक सीमित कर दिया गया है। जमीनी हकीकत यह है कि लाखों की लागत से बने भवनों में शौचालय और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नदारद हैं, जबकि दस्तावेजों में इन्हें पूर्ण दिखाया जा रहा है।
तबेला और कंडा पाथने का केंद्र बने सचिवालय
बढ़नी क्षेत्र के कई गांवों में पंचायत सचिवालयों की स्थिति दयनीय है। कहीं ग्रामीण इनमें पशु बांध रहे हैं, तो कहीं कंडा पाथा जा रहा है। कई भवन देखरेख के अभाव में जर्जर होकर खंडहर बन चुके हैं। प्रशासनिक सुस्ती का ही नतीजा है कि ग्रामीणों को अपने काम के लिए दर-दर भटकना पड़ता है, जबकि सचिवालयों पर दबंगों का बोलबाला है।
स्थानीय निवासियों ने नाम न छापने की शर्त पर प्रशासन से मांग की है कि मटियार उर्फ भुतहवा पंचायत भवन की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अवैध कब्जेदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर इसे जनहित के लिए मुक्त कराया जाए।