सिद्धार्थनगर: कार्यकाल बढ़ाने और लंबित भुगतान को लेकर हुंकार, ग्राम प्रधानों ने मुख्यमंत्री को भेजा मांग पत्र
📅 Published on: April 25, 2026
Kapilvastupost
शोहरतगढ़ (सिद्धार्थनगर)। विकास खंड शोहरतगढ़ परिसर में राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के बैनर तले शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण मासिक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में प्रधानों ने अपनी समस्याओं, अधिकारों में हो रही कटौती और लंबे समय से रुके हुए भुगतानों को लेकर कड़ा रोष व्यक्त किया।
कार्यकाल विस्तार की उठी मांग
संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष ताकीब रिज़वी ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में ग्राम प्रधानों ने पूरी निष्ठा के साथ विकास कार्यों को धरातल पर उतारा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि विकास की गति को बनाए रखने के लिए प्रधानों के कार्यकाल विस्तार पर गंभीरता से विचार किया जाए। संगठन ने मांग की है कि 26 मई 2026 के बाद ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक माना जाए या उनके कार्यकाल को आगे बढ़ाया जाए।
आर्थिक संकट से जूझ रही हैं पंचायतें
जिलाध्यक्ष डॉ. पवन मिश्रा ने सिद्धार्थनगर जनपद में लंबित विकास कार्यों और भुगतान की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि प्रत्येक ग्राम प्रधान का औसतन 15 से 20 लाख रुपये का भुगतान बकाया है।
मनरेगा के तहत बड़े स्तर पर भुगतान लंबित होने से मजदूरों को समय पर मजदूरी नहीं मिल पा रही है।
ग्राम निधि और मनरेगा की आईडी समय पर जारी न होने से विकास कार्य ठप पड़े हैं।

प्रमुख मांगें और ज्ञापन
बैठक के अंत में प्रधानों ने अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन खंड विकास अधिकारी (BDO) चंद्र भूषण तिवारी को सौंपा, जिसे मुख्यमंत्री तक भेजा जाना है। ज्ञापन में मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें की गई हैं:
मनरेगा और ग्राम निधि के अंतर्गत कराए गए कार्यों का तत्काल भुगतान।
चुनावी वर्ष में ‘ग्राम चौपाल’ कार्यक्रम पर रोक लगाई जाए।
पंचायतों के कार्यों में अनावश्यक प्रशासनिक हस्तक्षेप बंद हो।
ग्राम प्रधानों को उनके अधिकारों के अनुरूप सम्मान और सहयोग प्रदान किया जाए।


