प्रशासनिक उदासीनता: पंचायत भवन पर पुलिस चौकी’, कागजों में सिमटा विकास और ग्राम चौपाल का तमाशा

ग्राउंड रिपोर्ट: सरकार की मंशा पर फिर रहा पानी, जिम्मेदार मौन!

गुरु जी की कलम से
बढ़नी (सिद्धार्थनगर): उत्तर प्रदेश सरकार का नारा है— “गाँव की समस्या, गाँव में समाधान”, लेकिन विकास खंड बढ़नी के ग्राम पंचायत **कोटिया** और **बसहिया** में ज़मीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। यहाँ शासन की योजनाओं को जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी मिलकर पलीता लगा रहे हैं। शुक्रवार को निर्धारित ‘ग्राम चौपाल’ कार्यक्रम महज एक औपचारिकता बनकर रह गया, जहाँ जनता तो पहुँची लेकिन उन्हें सुनने वाला कोई नहीं था।
चौपाल से नदारद रहे जिम्मेदार, जनता बेहाल

निर्धारित रोस्टर के बावजूद कोटिया और बसहिया में आयोजित होने वाली चौपाल की धज्जियां उड़ा दी गईं। ग्राम प्रधान से लेकर आशा, आंगनबाड़ी, कोटेदार, सफाई कर्मी, पंचायत सहायक और एडीओ पंचायत तक इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम से नदारद रहे। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी समस्याओं को सुनने के बजाय जिम्मेदार अपनी कुर्सियों से दूर भाग रहे हैं।
बड़ा सवाल: पुलिस चौकी बना पंचायत भवन, तो कहाँ बैठते हैं सचिव?

सूत्रों के अनुसार, कोटिया ग्राम पंचायत का भवन वर्तमान में पुलिस चौकी के रूप में इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में यह गंभीर जांच का विषय है कि हर माह मानदेय पाने वाले पंचायत सहायक और सप्ताह में एक दिन बैठने वाले सचिव आखिर कहाँ अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं? जब भवन ही पुलिस के कब्जे में है, तो सरकारी बैठकों और सार्वजनिक चर्चाओं का आयोजन कागजों के अलावा कहाँ होता है?
सिस्टम की लापरवाही: नहीं उठ रहे आला अधिकारियों के फोन** इस घोर लापरवाही और सरकारी आदेशों की अवहेलना के संबंध में जब बी डी ओ बढ़नी से बात हुई तो उन्होंने बताया अधिकारियों की तैनाती पूर्व निर्धारित है समय से कार्यक्रम संचालन होगा। बावजूद इसके कार्यक्रम नहीं हुआ

सीडीओ (बलराम सिंह) के सीयूजी नंबरों पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो फोन रिसीव नहीं हुआ। उच्चाधिकारियों की यह चुप्पी दर्शाती है कि ब्लॉक स्तर पर चल रही इस मनमानी को किसका संरक्षण प्राप्त है।
सरकार की साख को बट्टा

ग्राम पंचायतों में इस तरह की उदासीनता से न केवल विकास कार्य बाधित हो रहे हैं, बल्कि अब ग्रामीणों का भरोसा भी सरकारी कार्यक्रमों से उठने लगा है। जहाँ एक ओर सरकार भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी प्रशासन का दावा करती है, वहीं बढ़नी क्षेत्र के ये हालात भ्रष्टाचार और कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहे हैं।