सिद्धार्थ नगर – इटवा में स्वास्थ्य विभाग का आधी रात एक्शन: इटवा का ‘जनता सेवा हॉस्पिटल’ सील, ताला बंद कर अंदर चल रहा था खेल

इटवा में एक हड्डी वाला डॉक्टर कई वर्षों से चर्चा में है जिसके पास न तो डिग्री है और अस्पताल पर बोर्ड ।

इटवा में स्वास्थ्य सेवा अब मानक विहीन अस्पतालों और फर्जी डिग्री धारी डॉक्टरों के हाथों में लाखों की आबादी के जान जोखिम में हैं विभाग को अभी तीन अस्पतालों के खिलाफ जांच और कार्यवाही का इटवा की जनता को इंतजार है। फर्जी अस्पतालों के चंगुल से जनता को कब राहत मिलेगी इसका इंतजार है।

गुरु जी की कलम से
*सिद्धार्थनगर।*
इटवा कस्बे में नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे **’जनता सेवा हॉस्पिटल’** पर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। 24 मई की रात (23 मई की घटना) नवजात की मौत के बाद जिस अस्पताल को ओपीडी और इमरजेंसी बंद करने का आदेश दिया गया था, वहां चोरी-छिपे मरीजों के ऑपरेशन किए जा रहे थे। शिकायत सही पाए जाने पर नोडल अधिकारी और तहसीलदार की संयुक्त टीम ने आधी रात को करीब 2 बजे अस्पताल को पूरी तरह सील कर दिया।

अस्पताल में भर्ती दो गंभीर प्रसूताओं (जिनका हाल ही में सी-सेक्शन हुआ था) को तुरंत एम्बुलेंस से मेडिकल कॉलेज शिफ्ट कराया गया है।
**LIU इनपुट पर सीएमओ ने भेजा दस्ता**
23 मई की रात इस अस्पताल में सीजर (ऑपरेशन) के दौरान एक नवजात की मौत हो गई थी। मामले की जांच कर रही तीन सदस्यीय टीम ने अंतिम फैसला आने तक अस्पताल की सभी सेवाओं पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद, अस्पताल प्रबंधन अंदर से ताला बंद कर गर्भवती महिलाओं के ऑपरेशन कर रहा था।
27 जून की देर शाम **सीएमओ डॉ. रजत कुमार चौरसिया** को एलआईयू (LIU) से इस गोरखधंधे की सटीक सूचना मिली। सीएमओ के निर्देश पर निजी अस्पतालों के नोडल अधिकारी डॉ. मानवेंद्र पाल, मजिस्ट्रेट के तौर पर तहसीलदार अजय कुमार और अधीक्षक डॉ. संदीप द्विवेदी रात करीब 9 बजे भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।
**ताला खोलने में आनाकानी, प्रबंधक ने झाड़ा पल्ला**
टीम जब मौके पर पहुंची तो अस्पताल का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद था और अंदर मौजूद लोग खिड़कियों से ताक-झांक कर रहे थे। अधिकारियों ने बाहर लिखे नंबर पर प्रबंधक प्रमोद कुमार को फोन किया, तो वह काफी देर तक टालमटोल करते रहे। आखिरकार, तीसरे दौर की बातचीत में प्रमोद कुमार ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उनका अब अस्पताल से कोई वास्ता नहीं है और इसे राकेश यादव नामक व्यक्ति चला रहा है।
**रोचक मोड़:** जब नोडल अधिकारी ताला तोड़ने के लिए सीएमओ से अनुमति मांग रहे थे, तभी तहसीलदार ने जैसे ही ताला हाथ में लिया, वह खुल गया। संभवतः टीम को अटकाने के लिए केवल ताला फंसाया गया था, बंद नहीं था।
**अंदर का नजारा देख उड़े होश, संदिग्ध दस्तावेज जब्त**
अस्पताल के भीतर दाखिल होते ही टीम दंग रह गई। वहां दो महिलाएं भर्ती थीं, जिनका हाल ही में सी-सेक्शन (बड़ा ऑपरेशन) किया गया था। मौके पर कोई भी जिम्मेदार डॉक्टर या प्रबंधक मौजूद नहीं था। ड्यूटी पर तैनात स्टाफ प्रवीण यादव, अंकिता और एक अन्य से जब पूछताछ की गई, तो अंकिता को छोड़कर कोई भी अपनी आईडी या योग्यता का प्रमाण पत्र नहीं दिखा सका।
**कड़ी कार्रवाई की तैयारी**
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके से कुछ चिकित्सकों के संदिग्ध दस्तावेज और स्टाफ से जुड़े कागजात जब्त कर लिए हैं। आधी रात को प्रसूताओं को सुरक्षित मेडिकल कॉलेज भेजने के बाद अस्पताल को पूरी तरह सील कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि नियमों के उल्लंघन और मरीजों की जान जोखिम में डालने के आरोप में अस्पताल प्रबंधन पर आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।