📅 Published on: July 1, 2026
निजाम अंसारी
**बढ़नी बाजार, ढेकहरी बुजुर्ग (सिद्धार्थनगर), उत्तर प्रदेश।**
जनपद सिद्धार्थनगर के बढ़नी बाजार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम ढेकाहरी बुजुर्ग (Dheakahari Bujurg) के रहने वाले यासिर सुहैल ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यासिर सुहैल (पिता: सुहैल अहमद) ने एशियन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित एमबीबीएस (MBBS) द्वितीय वर्ष की वार्षिक परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर न केवल अपने माता-पिता का, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
मेडिकल बायोलॉजी और जेनेटिक्स में गाड़े झंडे, मिले 97% अंक
यासिर ने परीक्षा के सभी विषयों में बेहद सराहनीय अंक प्राप्त किए हैं। उनकी असाधारण प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने **मेडिकल बायोलॉजी, जेनेटिक्स एवं पैरासाइटोलॉजी** जैसे कठिन विषय में **97 अंक** हासिल किए हैं। इसके अलावा उनके अन्य विषयों का स्कोरकार्ड इस प्रकार रहा:
*मस्क्युलोस्केलेटल सिस्टम:** 85 अंक

*कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम:* 81 अंक
*माइक्रोबायोलॉजी, वायरोलॉजी एवं इम्यूनोलॉजी:* 80 अंक
*रेस्पिरेटरी सिस्टम:* 78 अंक
*बेसिक फार्माकोलॉजी:* 77 अंक
*पैथोलॉजिकल एनाटॉमी:* 74 अंक
*डायजेस्टिव सिस्टम:* 73 अंक
विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षकों के मुताबिक, यासिर की कॉलेज में नियमित उपस्थिति और अनुशासित होकर पढ़ाई करने की आदत ने इस शानदार सफलता में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
परिवार और क्षेत्र में खुशी की लहर, भाई बोले- ‘बनेगा संवेदनशील डॉक्टर’
यासिर की इस बड़ी कामयाबी से उनके परिवार और ढेकहरी बुजुर्ग गाँव में खुशी का माहौल है। बधाई देने वालों का ताँता लगा हुआ है।
यासिर के बड़े भाई *डॉ. खुबैर अहमद* ने छोटे भाई की पीठ थपथपाते हुए कहा: “यासिर ने यह मुकाम अपनी कड़ी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर हासिल किया है। मुझे पूरा विश्वास है कि वह भविष्य में एक कुशल, संवेदनशील और समर्पित चिकित्सक (डॉक्टर) बनकर समाज और देश की सच्ची सेवा करेगा।”
इस मौके पर पिता सुहैल अहमद, परिवार के अन्य सदस्यों, रिश्तेदारों और क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने यासिर को मिठाई खिलाकर बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यासिर की यह सफलता यहाँ के दूसरे छात्र-छात्राओं को भी उच्च शिक्षा में कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करेगी।
“लक्ष्य सिर्फ एक योग्य डॉक्टर बनकर मानव सेवा करना है”
अपनी इस शानदार सफलता पर बात करते हुए यासिर सुहैल ने इसका पूरा श्रेय अपने माता-पिता के आशीर्वाद, अपने प्रोफेसर्स व शिक्षकों के सही मार्गदर्शन और अपनी निरंतर सेल्फ-स्टडी को दिया। यासिर ने कहा कि परीक्षा पास करना तो बस एक पड़ाव है, उनका असली लक्ष्य एक योग्य और ईमानदार डॉक्टर बनकर समाज के हर तबके की सेवा करना है, और वे आगे भी इसी समर्पण के साथ अपनी मेडिकल की पढ़ाई जारी रखेंगे।