**सिद्धार्थनगर (कपिलवस्तु पोस्ट)।** शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने क्षेत्र के संघर्षशील युवा नेता नौशाद आलम को शोहरतगढ़ विधानसभा का प्रभारी व भावी प्रत्याशी घोषित किया है। लखनऊ यूनिवर्सिटी से राजनीति शास्त्र में स्नातक और छात्र राजनीति में सक्रिय रहे नौशाद आलम का पारिवारिक बैकग्राउंड बेहद प्रतिष्ठित और जनसेवा से जुड़ा रहा है। ‘कपिलवस्तु पोस्ट’ के साथ खास बातचीत में नौशाद आलम और मौके पर मौजूद आजसपा के जिलाध्यक्ष राजेंद्र भारती ने क्षेत्र की समस्याओं, युवाओं के मुद्दों और जीत के समीकरणों पर बेबाकी से अपनी बात रखी।

**विरासत में मिली समाजसेवा और किसानों की लड़ाई**

नौशाद आलम बढ़नी विकास खंड के ग्राम टीसम के निवासी हैं। उनके पिता स्वर्गीय मास्टर ओबैदुल्लाह साहब अपने जमाने के प्रसिद्ध कांग्रेसी नेता, समाजसेवी और किसान नेता थे। वह गांधी आदर्श विद्यालय इंटर कॉलेज के फाउंडर मेंबर भी रहे। क्षेत्र में उन्हें गन्ना किसानों का मसीहा माना जाता था और उन्हीं की अनूठी पहल पर बढ़नी में चीनी मिल की स्थापना हुई थी। पिता की इसी जनसेवा की विरासत को लेकर नौशाद आलम अब शोहरतगढ़ की राजनीतिक शून्यता को समाप्त करने के लिए मैदान में हैं।

**जनता सबको आजमाकर थक चुकी, अब हमारी बारी: नौशाद आलम**

साक्षात्कार के दौरान जब नौशाद आलम से पूछा गया कि शोहरतगढ़ की जनता उन्हें क्यों चुने? तो उन्होंने कहा, “अब तक कई चुनाव हो चुके हैं और विपक्षी पार्टियों को वोट दे-देकर जनता थक चुकी है। जनता सबको आजमा चुकी है, लेकिन क्षेत्र की दशा नहीं बदली। अब हमारी बारी है। अभी तक प्रदेश में हमारी पार्टी की सरकार नहीं बनी है, हमें भी एक मौका मिलना चाहिए। आजाद समाज पार्टी लगातार आम नागरिकों के हक और अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक लड़ रही है, जिसे पूरा देश देख रहा है।”

**विजन और बुनियादी समस्याएं: युवाओं और किसानों का मुद्दा सर्वोपरि**

नौशाद आलम ने कहा कि अक्सर लोगों से सुनने को मिलता है कि शोहरतगढ़ विधानसभा में ‘राजनीतिक शून्यता’ है। इसे समाप्त कर जनता के असली मुद्दों और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए उन्होंने राजनीति में कदम बढ़ाया है। किसान, मजदूर, नौजवान, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में पिछड़ेपन को दूर करना ही उनका और उनकी पार्टी का मुख्य मकसद है।

 * **युवाओं और रोजगार का मुद्दा:** नौशाद आलम ने युवाओं के मुद्दे पर विशेष जोर देते हुए कहा कि शोहरतगढ़ विधानसभा आज भी तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में बेहद पिछड़ा है। यहाँ दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों के स्तर की शिक्षा, इंजीनियरिंग कॉलेज और तकनीकी संस्थानों की भारी कमी है। यही कारण है कि स्थानीय स्तर पर रोजगार नहीं मिल पाता और युवाओं को पलायन करना पड़ता है। युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना और क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा व रोजगार के साधन लाना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता और चुनौती है।

 * **किसानों की बदहाली:** क्षेत्र की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हर साल बाढ़ की त्रासदी, अच्छे बीज और खाद की किल्लत, सहकारी समितियों पर फसलों की सीधी बिक्री न होना किसानों की मुख्य समस्याएं हैं। डेयरी विकास, फल संरक्षण और हॉर्टिकल्चर (सब्जी उत्पादन) जैसे कृषि आधारित उद्योगों के लिए विकसित प्लेटफॉर्म न होना दुःखद है, जिसे वे धरातल पर सुधारना चाहते हैं।

foto mein dahini taraf jiladhyaksh rajendra bharti
foto mein dahini taraf jiladhyaksh rajendra bharti

**प्रभारी बनाए जाने पर कितना खरा उतरेंगे नौशाद? जिलाध्यक्ष ने दिया जवाब**

पार्टी द्वारा 15 जून को नौशाद आलम को शोहरतगढ़ का प्रभारी बनाए जाने और उन पर जताए गए भरोसे को लेकर जब मौके पर मौजूद **आजाद समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष राजेंद्र भारती** से सवाल किया गया, तो उन्होंने बड़े विश्वास के साथ जवाब दिया।

जिलाध्यक्ष राजेंद्र भारती ने कहा, “आजाद समाज पार्टी ने नौशाद आलम की सक्रियता, संघर्ष और पार्टी के जनाधार को आगे बढ़ाने के उनके काम को देखकर ही यह जिम्मेदारी दी है। नौशाद आलम एक बेहद संघर्षशील युवा नेता हैं और क्षेत्र की जनता के बीच उनकी सीधी पकड़ है। उनके परिवार का समाज और देश के लिए ऐतिहासिक योगदान रहा है। पार्टी को पूरा भरोसा है कि वे इस जिम्मेदारी पर 100% खरा उतरेंगे और पार्टी की नीति **’जिसकी जितनी संख्या भारी, उतनी उसकी हिस्सेदारी’** को मजबूत करते हुए सर्वसमाज को साथ लेकर चलेंगे।”

**जिलाध्यक्ष राजेंद्र भारती ने समझाया जीत का मजबूत समीकरण**

साक्षात्कार में जिलाध्यक्ष राजेंद्र भारती ने शोहरतगढ़ विधानसभा के जातिगत और रणनीतिक समीकरणों का पूरा गणित सामने रखा:

 * **पिछला प्रदर्शन:** 2022 के विधानसभा चुनाव में आजसपा प्रत्याशी प्रेम चंद निषाद को करीब 48 हजार मत मिले थे, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में विपरीत लहर के बावजूद शोहरतगढ़ विधानसभा से पार्टी को 19 हजार वोट मिले।

**वोट बैंक का गणित:** शोहरतगढ़ विधानसभा में लगभग 1 लाख दलित मतदाता हैं, जिनमें से 60 प्रतिशत मतदान होता है और यह वोट बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर एकजुट रहता है।

 * **मुस्लिम और बैकवर्ड का साथ:** इसके अलावा मुस्लिम समाज से लगभग 20 से 30 हजार वोट मिलने की प्रबल संभावना है। साथ ही, पार्टी के संघर्षों के आधार पर बैकवर्ड (पिछड़ा वर्ग) तबके से भी लगभग 10 हजार मत मिलने की उम्मीद है।

 * **गांव-गांव में पैठ:** राजेंद्र भारती ने बताया कि विधानसभा में लगभग 65 गांव ऐसे हैं जहां पार्टी को एकतरफा 200 से 250 वोट मिलने की संभावना है, और 100 से अधिक ऐसे गांव हैं जहां पार्टी का मजबूत कैडर होने के कारण कम से कम 100-100 वोट मिलना तय है। इस तरह आजसपा शोहरतगढ़ में जीत का एक मजबूत और अजेय समीकरण तैयार कर चुकी है।