📅 Published on: July 12, 2026
गुरु जी की कलम से
सिद्धार्थनगर
भारत-नेपाल सीमा से सटे अलीगढ़वा और चाकरचौड़ा बॉर्डर क्षेत्र में नेपाल की सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) द्वारा बढ़ाई गई सख्ती से सीमावर्ती इलाके के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नेपाल की सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुओं को भी सीमा पार ले जाने की अनुमति नहीं दे रही है। 
एक किलो सब्जी और केले तक पर रोक
एक किलो सब्जी, केला, किराना का सामान, कॉस्मेटिक और यहां तक कि पैकेट बंद खाद्य पदार्थों को भी रोका और जब्त किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई इतनी सख्त हो गई है कि आम आदमी के लिए रोजमर्रा की जरूरतों का सामान ले जाना भी मुश्किल हो गया है।
चेकिंग के दौरान बढ़ी नोकझोंक
स्थानीय लोगों के अनुसार, एपीएफ के जवान मुख्य गेट पर सामान उतरवा लेते हैं और बाद में उसे वाहन से अपने कैंप भेज देते हैं। इस तरह की कार्रवाई को लेकर सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों के बीच कई बार तीखी बहस और नोकझोंक की स्थिति भी बन चुकी है।
पृष्ठभूमि: भंसार शुल्क का नया नियम
गौरतलब है कि नेपाल सरकार ने नेपाली नववर्ष के अवसर पर भारत से लाए जाने वाले 100 नेपाली रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर कस्टम ड्यूटी वसूलने का नियम सख्त किया था। इसके विरोध में स्थानीय व्यापारियों और सांसदों ने भी आवाज उठाई। हालांकि नेपाल के अर्थ मंत्रालय ने बाद में यह सीमा बढ़ाकर 500 नेपाली रुपये कर दी, फिर भी सीमावर्ती लोग इसे नाकाफी बताते हुए इसे कम से कम 2000 रुपये तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
इसी तरह के एक मामले में नेपाल की सर्वोच्च अदालत ने भी दखल देते हुए अंतरिम आदेश में साफ कहा था कि दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर अत्यधिक सख्ती उचित नहीं है और अंतिम फैसला आने तक आम नागरिकों से टैक्स नहीं वसूला जाना चाहिए।भारतीय व्यापारियों पर असर: भारतीय क्षेत्र में दुकानों पर पसरा सन्नाटा
सीमा पर बढ़ी सख्ती का सबसे ज्यादा खामियाजा भारतीय क्षेत्र के छोटे दुकानदारों को भुगतना पड़ रहा है। पहले जहां नेपाली ग्राहकों की आवाजाही से बाजार गुलजार रहता था, वहीं अब दुकानों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। सब्जी, किराना और कॉस्मेटिक की दुकानों पर बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि रोजाना का कारोबार 50 प्रतिशत से भी नीचे आ गया है। कई दुकानदारों ने बताया कि दिनभर ग्राहक की बाट जोहने के बाद भी शाम तक गल्ला खाली रह जाता है। सीमा पर सख्ती से जो नेपाली ग्राहक पहले रोज बाजार आते थे, अब वे नेपाल के ही स्थानीय बाजारों का रुख कर रहे हैं। व्यापारी नेताओं ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि सीमा पर स्थिति को जल्द सामान्य किया जाए। उनका कहना है कि अगर यही हालात रहे तो कई छोटे व्यापारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है।
सीमा पर बढ़ी सख्ती का सीधा असर सीमावर्ती बाजारों पर भी पड़ रहा है। नेपाली ग्राहकों की संख्या घटने से भारतीय व्यापारियों की बिक्री प्रभावित हो रही है, वहीं नेपाल के बेलहिया, भैरहवा और बुटवल जैसे बाजारों में ग्राहकों की भीड़ बढ़ने लगी है।
जनता की मांग
सीमावर्ती क्षेत्र के निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुओं — सब्जी, फल, राशन जैसी बुनियादी जरूरतों — को इस सख्ती से मुक्त रखा जाए, ताकि दोनों देशों के बीच पीढ़ियों से चली आ रही सहज आवाजाही प्रभावित न हो।