📅 Published on: July 12, 2026
गुरु जी की कलम से
बढ़नी (सिद्धार्थनगर)।
कहते हैं जब प्रशासनिक चौखटों पर चप्पलें घिसने के बाद भी सुनवाई न हो, तो जनता को अपनी आवाज बुलंद करने के लिए नए रास्ते तलाशने पड़ते हैं। कुछ ऐसा ही अनोखा नजारा विकास खंड बढ़नी के अंतर्गत आने वाले ग्राम पिपरा में देखने को मिल रहा है। पिछले एक दशक (10 वर्ष) से सड़क की बदहाली का दंश झेल रहे ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। शासन-प्रशासन की बेरुखी से नाराज ग्रामीणों ने अब गांव की सूरत बदलने के लिए सोशल मीडिया को अपना हथियार बना लिया है।
**DM, सांसद और विधायक को कर रहे टैग; सोशल मीडिया पर छिड़ी ‘जंग’**
पिपरा गांव के युवाओं और ग्रामीणों ने मिलकर फेसबुक, एक्स (ट्विटर) और व्हाट्सएप जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर एक सघन मुहिम छेड़ रखी है। ग्रामीण बदहाल, कीचड़ से सनी और गड्ढों में तब्दील हो चुकी सड़क की तस्वीरें और वीडियो लगातार पोस्ट कर रहे हैं। इस मुहिम के जरिए सीधे जिले के जिलाधिकारी (DM), स्थानीय सांसद और क्षेत्रीय विधायक को टैग कर सड़क निर्माण की गुहार लगाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि डिजिटल माध्यम से वे सोए हुए सिस्टम को जगाने का प्रयास कर रहे हैं।
**10 साल का दर्द: ‘सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क, पता नहीं चलता’**
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले 10 सालों से इस सड़क की मरम्मत के नाम पर एक ईंट तक नहीं रखी गई है।
* **बरसात में नरक बनते हालात:** बारिश के दिनों में यह सड़क पूरी तरह तालाब का रूप ले लेती है।
* **हादसों को दावत:** आए दिन स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और बाइक सवार इन गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
* **आपातकालीन सेवाएं ठप:** सड़क की जर्जर हालत के कारण एम्बुलेंस या अन्य गाड़ियां गांव में आने से कतराती हैं, जिससे मरीजों को मुख्य मार्ग तक ले जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
गांव के युवा कैफ खान के साथ ग्रामीण बताते हैं”हम पिछले कई सालों से जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक के चक्कर काट कर थक चुके हैं। सिर्फ आश्वासन मिलते हैं, काम नहीं। इसीलिए अब हम सबने तय किया है कि जब तक सड़क नहीं बनेगी, तब तक सोशल मीडिया पर हमारी यह मुहिम थमेगी नहीं।”*
**अब तक नहीं हुई कोई सुनवाई, आक्रोश में ग्रामीण**
हैरानी की बात यह है कि सोशल मीडिया पर यह मुहिम लगातार ट्रेंड कर रही है और लोगों का ध्यान खींच रही है, लेकिन इसके बावजूद अभी तक संबंधित विभाग या किसी जिम्मेदार अधिकारी ने इस पर सुध नहीं ली है। प्रशासनिक अमले की यह खामोश चुप्पी ग्रामीणों के आक्रोश को और भड़का रही है।
अब देखना यह होगा कि सोशल मीडिया पर गूंज रही पिपरा गांव के ग्रामीणों की यह ‘अनोखी पुकार’ जिले के आला अधिकारियों और माननीय जनप्रतिनिधियों के कानों तक कब पहुंचती है, और इस बदहाल सड़क को कब तक ‘कंक्रीट’ की नई जिंदगी मिलती है।