**UP: दावों की खुली पोल! सिद्धार्थनगर में ट्रांसफार्मर के तारों को छूकर स्कूल जाने को मजबूर हैं नौनिहाल**

Kapilvastupost

सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश में शिक्षा और ग्रामीण विकास को लेकर सरकार भले ही बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन सिद्धार्थनगर जिले से सामने आई एक तस्वीर इन दावों की हकीकत बयां करने के लिए काफी है। भनवापुर विकास खंड की ग्राम पंचायत बेतनार में स्थित संविलियन विद्यालय तक जाने वाला मुख्य मार्ग पूरी तरह बदहाल हो चुका है। आलम यह है कि स्कूली बच्चों को रोजाना घुटने भर पानी और दलदल जैसे कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। सबसे ज्यादा हैरान और डराने वाली बात यह है कि इस जानलेवा कीचड़ से बचने के लिए मासूम बच्चे रास्ते में लगे बिजली के ट्रांसफार्मर के पोल और उसके पास लटक रहे तारों का सहारा ले रहे हैं। ग्रामीणों की बार-बार की शिकायत के बाद भी प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है, जिससे यहाँ कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
ग्राम पंचायत बेतनार स्थित इस संविलियन विद्यालय का यह संपर्क मार्ग पिछले कई वर्षों से जर्जर पड़ा है। मानसून की बारिश आते ही यह पूरी सड़क एक गहरे दलदल में तब्दील हो जाती है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले करीब 15 वर्षों से इस मार्ग का न तो निर्माण कराया गया और न ही कोई मरम्मत हुई है। हर साल बरसात में बच्चों को इसी तरह जान जोखिम में डालकर स्कूल जाना पड़ता है।
इस बदहाली पर सिर्फ ग्रामीण ही नहीं, बल्कि विद्यालय के शिक्षक भी बेहद चिंतित हैं। शिक्षकों का कहना है कि कीचड़ से पैर बचाने के चक्कर में छोटे-छोटे बच्चे बिजली के ट्रांसफार्मर के पोल और उसके आसपास लगे तारों को पकड़कर आगे बढ़ते हैं। यह स्थिति बेहद संवेदनशील है, क्योंकि हल्की सी लापरवाही या करंट उतरने की स्थिति में मासूमों की जान पर बन सकती है।
**बाइट (ग्रामीण)”15 साल से सड़क का यही हाल है। बच्चे रोज गिरते हैं, कपड़े गंदे होते हैं। बिजली के खंभे को पकड़कर बच्चे निकलते हैं, हमें हर वक्त डर लगा रहता है कि कोई बड़ा हादसा न हो जाए। कोई सुनवाई नहीं हो रही।”*
स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल इस सड़क का निर्माण कराने और ट्रांसफार्मर के पास सुरक्षा इंतजाम पुख्ता करने की मांग की है। इस पूरे मामले में जब खंड विकास अधिकारी (BDO) भनवापुर से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने मामले की जांच कर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
बताते चलें एक तरफ डिजिटल इंडिया और ‘पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया’ के नारे हैं, तो दूसरी तरफ बेतनार गांव की यह खौफनाक तस्वीर। अब देखना यह होगा कि प्रशासन की नींद कब टूटती है और इन नौनिहालों को इस जानलेवा सफर से कब तक मुक्ति मिलती है।