📅 Published on: July 15, 2026
गुरु जी की कलम से
*सकारपार (सिद्धार्थनगर):* उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के खेसरहा थाना क्षेत्र स्थित मिरवापुर गांव से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। मंगलवार को स्कूल में पढ़ने गए तीन बच्चे स्कूल के पास ही स्थित एक नाले में नहाने के दौरान डूब गए। इस हादसे में दो मासूम बच्चों की गहरे पानी में जाने से मौत हो गई, जबकि ग्रामीणों की तत्परता से एक बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस घटना के बाद से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
मिरवापुर गांव के रहने वाले तीन बच्चे—बबुआ का पुत्र आयुष गौंड़ (8 वर्ष), रामजीवन का पुत्र नील (5 वर्ष) और राजेंद्र का पुत्र रीतेश (11 वर्ष)—मंगलवार को स्कूल के लिए निकले थे।
**मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) का समय:** स्कूल से करीब 100 मीटर दूर दक्षिण दिशा में स्थित एक नाले के पास तीनों बच्चे पहुंच गए और उसमें स्नान करने लगे।
**गहरे पानी में समाए मासूम:** नहाते समय आयुष और नील अचानक गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। उन्हें डूबता देख रीतेश उन्हें बचाने के लिए आगे बढ़ा, लेकिन वह भी खुद को संभाल नहीं पाया और डूबने लगा।
*ग्रामीणों ने एक को बचाया:** नाले से कुछ दूरी पर मौजूद ग्रामीणों ने जब रीतेश को डूबते देखा, तो उन्होंने तुरंत नाले में छलांग लगा दी और रीतेश को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
**अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया:** रीतेश से मिली जानकारी के बाद ग्रामीणों ने नाले में सघन तलाशी अभियान चलाया और नील व आयुष को भी बाहर निकाला। दोनों को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
## दो घरों के इकलौते चिराग बुझे
इस हृदयविदारक घटना ने दो परिवारों को कभी न भूलने वाला जख्म दिया है। दोनों ही मृतक बच्चे अपने-अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे।
**आयुष गौंड़** | 8 वर्ष | कक्षा 2 | पिता बबुआ मुंबई में मजदूरी करते हैं। परिवार में एक 5 साल की बहन है। |
| **नील** | 5 वर्ष | कक्षा 1 (गैर-नामांकित) | पिता राम सजीवन का इकलौता पुत्र। परिवार में एक 3 साल की बहन है। |
**नोट:** विद्यालय के प्रधानाध्यापक रामभजन के अनुसार, यह घटना मिड-डे मील के समय हुई। विद्यालय के रिकॉर्ड में केवल आयुष (कक्षा 2) नामांकित था, जबकि नील का नामांकन नहीं था।
## ग्रामीणों का गंभीर आरोप: “चाय पीने गए थे शिक्षक”
इस घटना के बाद ग्रामीणों में स्कूल प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यह पूरी घटना शिक्षकों की घोर लापरवाही के कारण हुई है।
* लोगों का कहना है कि अगर शिक्षक बच्चों पर ध्यान देते, तो वे स्कूल परिसर से बाहर नाले की तरफ नहीं जाते।
* ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि हादसे के वक्त अध्यापक स्कूल में मौजूद नहीं थे और वे बाहर चाय पीने गए हुए थे।
## पुलिस कार्रवाई और मुआवजे का आश्वासन
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और तहसील प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई।
**पोस्टमार्टम से इनकार:** खेसरहा थाना प्रभारी अनूप कुमार मिश्र ने बताया कि परिजनों ने बच्चों के शवों का पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने पंचनामा की प्रक्रिया पूरी कर दोनों शवों को अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया।
**प्रशासनिक मदद:** घटना की जानकारी मिलते ही नायब तहसीलदार मकबूल अंसारी ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और सरकार की तरफ से उचित मुआवजा दिलाने का पूरा आश्वासन दिया।