📅 Published on: July 17, 2026
गुरु जी की कलम से
**बढ़नी।** पूर्वोत्तर रेलवे के बढ़नी रेलवे स्टेशन पर इन दिनों वाहन पार्किंग के नाम पर अवैध वसूली और यात्रियों से अभद्रता का एक गंभीर मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों और यात्रियों का आरोप है कि स्टेशन परिसर में पार्किंग नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अवैध रूप से वसूली की जा रही है। विरोध करने पर यात्रियों, महिलाओं और सीधे-सादे ग्रामीणों के साथ गाली-गलौज और बदसलूकी की जाती है, जिससे स्टेशन आने वाले यात्रियों में भारी रोष है।
**न तो रेट लिस्ट का पता, न ही रसीद पर कोई ब्यौरा**
रेलवे के कड़े नियमों के मुताबिक, हर अधिकृत पार्किंग स्थल पर एक बड़ा और स्पष्ट रेट बोर्ड (शुल्क तालिका) होना अनिवार्य है, जिस पर ठेकेदार का नाम, संपर्क नंबर और शुल्क का विवरण दर्ज हो। लेकिन बढ़नी रेलवे स्टेशन पर ऐसा कोई बोर्ड दूर-दूर तक नजर नहीं आता।
यात्रियों का आरोप है कि पैसे वसूलने वाले न तो किसी निर्धारित वर्दी में होते हैं और न ही उनके पास कोई पहचान पत्र होता है। पैसे देने के बाद जो पर्ची थमाई जा रही है, वह पूरी तरह फर्जी प्रतीत होती है। उस साधारण कागज़ के टुकड़े पर न तो ठेकेदार का नाम है, न जीएसटी (GST) नंबर, न रेलवे की कोई मुहर और न ही स्टेशन का नाम।
*पीड़ित यात्रियों का कहना है:*
“गांव-देहात से जब महिलाएं और बच्चे ट्रेन पकड़ने आते हैं, तो ये कथित पार्किंग कर्मी उन्हें घेरकर अवैध पैसों की मांग करते हैं। असमर्थता जताने या नियम पूछने पर सीधे गाली-गलौज और गुंडागर्दी पर उतारू हो जाते हैं। सरकारी जगह पर इस तरह का ‘गुंडा टैक्स’ वसूलना बेहद शर्मनाक है।”
**स्टेशन के बाहर ₹1000 जुर्माने का अवैध बोर्ड, अंदर अतिक्रमण का बोलबाला**
इस अवैध खेल की हद यहीं खत्म नहीं होती। रेलवे परिसर से बाहर, जहाँ फ्री पिक-एंड-ड्रॉप की सुविधा होनी चाहिए, वहाँ आरोपियों ने अपनी मर्जी से **”गाड़ी खड़ी करने पर ₹1000 जुर्माना”** वसूलने का एक अवैध बोर्ड टांग रखा है। वहीं दूसरी तरफ, इसी प्रतिबंधित क्षेत्र में धड़ल्ले से ठेले और चाय-पानी की दुकानें सजवाकर अतिक्रमण कराया जा रहा है, जिससे यात्रियों को आने-जाने में भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
**जांच और सख्त कार्रवाई की मांग**
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भारतीय रेलवे और स्थानीय प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों ने सवाल उठाया है कि:
* क्या इस पार्किंग का कोई वैध ठेका आवंटित भी है या यह पूरी तरह से अवैध है?
* बिना वर्दी और पहचान पत्र के वसूली करने वाले ये संदिग्ध लोग कौन हैं?
* यदि ठेका वैध है, तो तय मानकों के अनुसार आधिकारिक रेट लिस्ट का बोर्ड तुरंत क्यों नहीं लगाया जा रहा?
यात्रियों ने रेल प्रशासन से इस धोखाधड़ी और अतिक्रमण के खिलाफ तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है ताकि आम जनता को इस मानसिक और आर्थिक शोषण से निजात मिल सके।