डॉ. भास्कर शर्मा को मिला सर्वश्रेष्ठ शोध-पत्र पुरस्कार, अप्लास्टिक एनीमिया पर किए गए शोध को मिली अंतरराष्ट्रीय मान्यता

सिद्धार्थनगर के प्रो. डॉ. भास्कर शर्मा ने होम्योपैथी अनुसंधान में बढ़ाया देश का मान

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सिद्धार्थनगर / डुमरियागंज: होम्योपैथी चिकित्सा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सिद्धार्थनगर के प्रसिद्ध प्रो. डॉ. भास्कर शर्मा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ शोध-पत्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान उनके शोध-पत्र “होम्योपैथी में अप्लास्टिक एनीमिया : एक समीक्षात्मक अध्ययन” के लिए प्रदान किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय बहुविषयक अनुसंधान पत्रिका के सितंबर 2026 अंक में प्रकाशित

डॉ. भास्कर शर्मा का यह शोध-पत्र ‘अंतरराष्ट्रीय बहुविषयक अनुसंधान एवं समीक्षा पत्रिका’ के सितंबर 2026 के अंक (खंड 5, अंक 9, पृष्ठ संख्या 38 से 42) में प्रकाशित हुआ है।

शोध-पत्र की उत्कृष्ट गुणवत्ता, मौलिकता, वैज्ञानिक महत्त्व और चिकित्सा शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए इसे ‘सर्वश्रेष्ठ शोध-पत्र’ के रूप में चुना गया।

अप्लास्टिक एनीमिया जैसे गंभीर रोग का वैज्ञानिक विश्लेषण

इस शोध-पत्र में अप्लास्टिक एनीमिया जैसे अत्यंत गंभीर रक्त संबंधी रोग के संदर्भ में होम्योपैथी से संबंधित उपलब्ध साहित्य, पूर्व अध्ययनों और उपलब्ध तथ्यों का वैज्ञानिक एवं शोधपरक विश्लेषण किया गया है। यह अध्ययन इस जटिल बीमारी के प्रति नई वैज्ञानिक दृष्टिकोण और दिशा प्रदान करता है।

“प्रमाण आधारित अनुसंधान ही चिकित्सा जगत की कुंजी”

पुरस्कार प्राप्त करने पर डॉ. भास्कर शर्मा ने शोध और वैज्ञानिक अध्ययन के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा:

“चिकित्सा के क्षेत्र में किसी भी पद्धति को लेकर निरंतर अध्ययन, प्रमाण आधारित अनुसंधान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है। शोध के माध्यम से उपलब्ध जानकारी का व्यवस्थित अध्ययन चिकित्सा जगत में ज्ञान को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।”

चिकित्सकों और शुभचिंतकों ने दी बधाई

डॉ. भास्कर शर्मा होम्योपैथी चिकित्सा के साथ-साथ अनुसंधान, वैज्ञानिक अध्ययन और शैक्षणिक गतिविधियों में निरंतर सक्रिय हैं। अप्लास्टिक एनीमिया जैसे जटिल विषय पर अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने पर क्षेत्र के चिकित्सकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई दी।

स्थानीय चिकित्सकों और सहयोगियों का मानना है कि यह उपलब्धि न केवल समाज के लिए नई वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराएगी, बल्कि भावी शोधकर्ताओं को भी अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।