📅 Published on: October 13, 2026
Kapilvastupost
सिद्धार्थनगर जिले के विकासखंड भनवापुर अंतर्गत स्थित नाउडिह गांव से सरकारी दावों और जमीनी हकीकत की पोल खोलती तस्वीर सामने आई है। गांव में मूलभूत सुविधाओं की घोर बदहाली को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। लाखों की लागत से बना सामुदायिक शौचालय शो-पीस बना हुआ है, तो वहीं पिछले तीन वर्षों से बंद पड़े आरोग्य केंद्र के कारण ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं से महरुप हैं। इसके अलावा, श्मशान घाट तक जाने के लिए पक्की सड़क न होने से अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौन साधे हुए हैं।
प्रमुख बिंदु एवं जमीनी स्थिति
ताले में कैद सामुदायिक शौचालय, कागजों पर केयरटेकर: गांव में ग्रामीणों की सुविधा के लिए बनाया गया सामुदायिक शौचालय बदहाली का शिकार है। मुख्य दरवाजे पर ताला लटका रहता है, पानी के नल गायब हैं और पानी की टंकी पूरी तरह टूटी हुई है। परिसर के आसपास गंदगी का अंबार लगा हुआ है। ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि नियुक्त केयरटेकर सिर्फ फोटो खिंचवाने और औपचारिकता पूरी करने आता है, जिसके बाद शौचालय फिर से बंद कर दिया जाता है।
तीन साल से बंद आरोग्य केंद्र, स्वास्थ्य सेवाएं ठप: शौचालय परिसर के पास ही निर्मित आरोग्य केंद्र पिछले तीन वर्षों से आज तक खुला ही नहीं है। करोड़ों की स्वास्थ्य योजनाओं के दावों के बीच यह सवाल खड़ा होता है कि आखिर यह आरोग्य केंद्र अब तक क्रियाशील क्यों नहीं किया गया? केंद्र बंद रहने से ग्रामीणों को मामूली इलाज के लिए भी दूर-दराज के अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
श्मशान घाट तक पक्की सड़क नहीं, कीचड़ से गुजरने को मजबूर ग्रामीण: गांव के श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए कोई पक्का रास्ता नहीं है। बारिश के मौसम में पूरा रास्ता पानी और दलदल में तब्दील हो जाता है। किसी ग्रामीण के निधन पर अंतिम यात्रा में शामिल लोगों को शव लेकर पानी और भारी कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे अंतिम संस्कार जैसे दुखद अवसर पर भी लोगों को यातना झेलनी पड़ती है।
पक्ष एवं प्रशासनिक स्थिति
गांव की इन गंभीर समस्याओं और बदहाली के संबंध में जब ग्राम प्रधान का पक्ष जानने के लिए उनसे दूरभाष (फोन) के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया, जिससे उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी एवं संबंधित उच्चाधिकारियों से मांग की है कि मामले का संज्ञान लेकर तत्काल सामुदायिक शौचालय व आरोग्य केंद्र को चालू कराया जाए तथा शमशान घाट तक पक्के मार्ग का निर्माण कराया जाए।