प्रधान प्रतिनिधि सूरत यादव और उनकी प्रधान पत्नी की ओर से क्षेत्रवासियों को करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं

करवा चौथ: सुहागिनों ने रखा अखंड सौभाग्य का व्रत, चांद के दीदार के साथ खोला उपवास

निज़ाम अंसारी 

सिद्धार्थनगर / बढ़नी : पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाने वाला करवा चौथ का पावन त्योहार बहुत ही श्रद्धा, उल्लास और धूमधाम के साथ मनाया गया। सुबह तड़के ‘सरगी’ खाने के बाद सुहागिन महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा और दिनभर पूजा-पाठ की तैयारियों में जुटी रहीं। महिलाओं में इसको लेकर विशेष उत्साह देखा गया।

  • बाजारों में रौनक और पारंपरिक श्रृंगार: त्योहार को लेकर बाजारों में कई दिनों पहले से ही काफी रौनक देखने को मिल रही थी। सुबह से ही महिलाएं पारंपरिक लाल और गुलाबी परिधानों (साड़ी और लहंगे) में सजी-धजी नजर आईं। हाथों में पिया के नाम की रची मेहंदी, माथे पर बिंदिया और सोलह श्रृंगार के साथ सुहागिनों ने करवा माता की पूजा-अर्चना की।

  • कथा और आपसी शुभकामनाएं: शाम के समय मोहल्लों और सोसाइटियों में महिलाओं ने एक साथ बैठकर करवा चौथ की कथा सुनी और एक-दूसरे से करवा बदलकर अखंड सौभाग्य की कामना की।

  • चांद का दीदार और व्रत समापन: शाम होते ही सभी की निगाहें आसमान में चांद निकलने का इंतजार करने लगीं। करवा चौथ के व्रत में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व होता है। महिलाओं ने छलनी से चांद का दीदार करने के बाद अपने पति का चेहरा देखा और फिर पति के हाथों जल ग्रहण करके अपना निर्जला उपवास पूरा किया।

  • डिजिटल और आधुनिक अंदाज: डिजिटल दौर में नौकरीपेशा और अपने पतियों से दूर रहने वाली महिलाओं के लिए तकनीक ने इस त्योहार को और खास बना दिया। कई जोड़ों ने वीडियो कॉल के जरिए चांद देखने और पूजा करने की रस्म निभाई। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने पूजा और मेहंदी की खूबसूरत तस्वीरें साझा कीं।

करवा चौथ का यह पावन पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते में आपसी प्रेम, समर्पण और विश्वास को और अधिक मजबूत बनाता है। चांद के दीदार के साथ ही सुहागिनों का यह व्रत सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।