रामजानकी इंटर कॉलेज भ्रष्टाचार कांड: 4 शिक्षकों की जगह 39 को वेतन! एक महीने बाद जागे जिम्मेदार, जांच के आदेश
📅 Published on: November 3, 2026
कपिलवस्तुपोस्ट
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल देने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। जिले के रामजानकी इंटर कॉलेज, कुंगाई गिरधरपुर में भ्रष्टाचार के ऐसे गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगे हैं, जो जिम्मेदारों की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान खड़े करते हैं। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर मामले में शिकायत के एक महीने बाद अब जाकर प्रशासन की नींद टूटी है और जांच के आदेश जारी किए गए हैं।
कॉलेज के ही शिक्षक सज्जाद अली ने संस्थान के भीतर चल रहे बड़े खेल का पर्दाफाश किया है। उनका आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन ने महज 4 स्वीकृत शिक्षकों के स्थान पर कथित तौर पर फर्जी तरीके से 39 लोगों की नियुक्ति दिखा दी। इन कागजी और फर्जी नियुक्तियों के जरिए लम्बे समय से सरकारी धन से वेतन और अन्य भत्तों का अवैध भुगतान किया जा रहा है। शिक्षा के मंदिर को लूट का अड्डा बना देने का यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार है।
शिकायतकर्ता ने सिर्फ यहीं तक सीमा नहीं रखी, बल्कि कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल धर्मराज चौधरी की नियुक्ति, वेतन और पेंशन की प्रक्रिया को लेकर भी तीखे सवाल खड़े किए हैं। उनका दावा है कि जिस पूर्व प्रिंसिपल को न्यायालय द्वारा बर्खास्त किया जा चुका हो, उन्हें आखिर किस नियम के तहत दोबारा पिछले दरवाजे से नियुक्ति दे दी गई? और अब किस आधार पर उन्हें भारी-भरकम पेंशन का लाभ दिया जा रहा है? यह अपने आप में एक बड़ा रहस्य है, जो विभागीय मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
इस पूरे प्रकरण ने शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के निकम्मेपन को बेनकाब कर दिया है। एक तरफ शिक्षक ने भ्रष्टाचार के पुख्ता दस्तावेजों के साथ आवाज उठाई, वहीं जिम्मेदार अधिकारी एक महीने तक फाइलों को दबाकर बैठे रहे। हालांकि, अब जब मामला तूल पकड़ चुका है, तो प्रशासन हरकत में आया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने आखिरकार संज्ञान लिया है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की बात कही है। अब देखना यह होगा कि कागजी घोड़ों पर दौड़ने वाले इस भ्रष्टाचार के बड़े चेहरों पर प्रशासन का हंटर कब चलता है या यह जांच भी फाइलों के कब्रिस्तानों में दफन होकर रह जाती है।
बाइट (Bites)
बाइट-1: सज्जाद अली (शिक्षक एवं शिकायतकर्ता)
बाइट-2: शिवशरणप्पा जीएन (जिलाधिकारी, सिद्धार्थनगर)


