सिद्धार्थनगर – गरीबों का निवाला छीनते जिम्मेदार, मिल बांट कर खाने का माध्यम बना मनरेगा योजना….

क्या सरकार बनाने में अहम कड़ी होते हैं प्रधान इसलिय इनके काम की जांच नहीं होती है तमाम वित्तीय अनियमितता और भरष्टाचार होने के बाद भी सिद्धार्थनगर में किसी भी प्रधान के खिलाफ कड़ी कार्यवाही नहीं हो पाती है 

हाजरी 220 मजदूरों की मौके पर काम कर रहे सिर्फ पचासी मजदूर…….

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बढ़नी विकास क्षेत्र में इस समय मनरेगा योजना मिल बांट कर खाने का माध्यम बना हुआ है। उदाहरण के तौर पर क्षेत्र के ग्राम पंचायत बसहिया में मंगलवार को ऑनलाइन एक आईडी पर कार्य चल रहा है। जिसके लिए कुल 220 मजदूरों की हाजिरी लगाई जा रही है। लेकिन मौके पर सिर्फ पचासी मजदूर कार्य पर मौजूद रहे।जिसमें दो मजदूर किशोरावस्था के छात्र भी शामिल हैं।

उल्लेख है कि शासन स्तर से मनरेगा योजना में लूट खसोट रोकने के लिए सीधे मजदूरों के खाते में मजदूरी भेजी जाती है। इसके अलावा इस वर्ष से प्रतिदिन मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी भी लगाई जा रही है। बावजूद इसके विभागीय जिम्मेदार गांव के अपने चाहतों की सिर्फ हाजिरी लगाकर बिना काम कराए उनके खातों में मजदूरी भिजवाने का कार्य कर रहे हैं। जिसे बाद में मिल बांट कर हजम कर लिया जाता है ।

जानकारो की माने तो मिट्टी का कार्य मनरेगा योजना के तहत धरातल पर लगभग 15 फीसद ही काम हो पाता है। जो भी हो ग्राम पंचायत बसहिया में एक सप्ताह से कार्य कर रहे पचासी मजदूरों की माने तो कृष्ण पाल सिंह के खेत से नौडीहवा सरहद तक मिटटी पटाई कार्य किया जा रहा है। लोगों के अनुसार जब से काम शुरू हुआ है इतने ही लोग कार्य कर रहे हैं।

मौके पर कार्य करा रहे रोजगार सेवक ने बताया कि शादी विवाह का समय चलने के कारण मजदूर बराबर नहीं मिल पा रहे हैं। क्षेत्र के अन्य कई गांव में भी मनरेगा योजना के तहत कराए जा रहे कार्यों का भी उक्त इसी तरह की हाल है।

खंड विकास अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि अगर ऐसी शिकायत है तो मौके पर जाकर जांच कराउंगा। कमी मिलने पर कारवाई किया जाएगा |