📅 Published on: September 21, 2023
यांत्रिक कार्यशाला में उपकरणों की वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हुई विधिवत पूजा
Kapilvastupost
बांसी – सिद्धार्थनगर। डॉ दशरथ चौधरी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में सृष्टि के पहले वास्तुकार एवम् शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा की पूजा आज उनके जयंती पर विधि विधान पूर्वक की गई।संस्था स्थित यांत्रिक अभियन्त्रण विभाग के कार्यशाला में स्थापित उपकरणों की वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा अर्चन किया गया।
रविवार को सर्वप्रथम धर्माचार्य पं.उमेश चंद्र मिश्र के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच संस्था के चेयरमैन डॉ दशरथ चौधरी द्वारा भगवान विश्वकर्मा की स्तुति की गई। उसके बाद कार्यशाला में स्थापित लैथ, पॉवर हेक्सा , ग्रांडिग, शलाटर कट, ड्रिलिंग ,स्प्रे पेंटिंग, स्मोक टेस्टिंग आदि मशीनों पर माल्यार्पण कर वैदिक मंत्रोचारण के साथ विधिवत पूजा अर्चना की गई। इस दौरान उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए संस्था प्रमुख डॉ दशरथ चौधरी ने कहा कि हम सभी के जीवन में शिप्ल का अत्यधिक महत्व है। कोई भी घर, मकान, भवन, नवीन रचना का काम शिल्प के अंतर्गत ही आता है। कुशल शिल्प विद्या और ज्ञान से मनुष्य विशाल इमारते, पुल, वायुयान, रेल, सड़क पानी के जहाज, वाहन आदि बनाता है।इसलिए हम सभी के जीवन में शिल्प विद्या का शुरू से महत्व रहा है। आधुनिक समय में इंजीनियर, मिस्त्री, वेल्डर, मकेनिक जैसे पेशेवर लोग शिल्प निर्माण का काम करते है।इसलिए मनुष्य के जीवन में सदैव विश्वकर्मा पूजा का महत्व है। यदि मनुष्य के पास शिल्प ज्ञान न हो तो वह कोई भी भवन, इमारत नही बना पायेगा। इसलिए भगवान विश्वकर्मा को वास्तुशास्त्र का देवता भी कहा जाता है। इनको प्रथम इंजीनियर देवताओं का इंजीनियर और मशीन का देवता भी कहा जाता है। उक्त अवसर पर प्रमुख रूप से नरेंद्र सिंह चौधरी,विनय कुमार ,संतोष कुमार गोंड,प्रवीण पटेल,मनीष गुप्ता,अशोक चौधरी,अनील श्रीवास्तव,शैलेश चौबे,अमन कुमार, संतोष सिंह,मनोज कुमार, राहुल मिश्रा,किशन कुमार ,महेंद्र नाथ पांडेय,खुर्शीद खान,सोनू वाल्मिकी सहित संस्था में अध्ययनरत छात्र उपस्थित रहें।