शोहरतगढ विधायक विनय वर्मा ने पत्र लिखकर पीडब्ल्यूडी पर बिना उनकी मौजूदगी के शिलान्यास, लोकार्पण व भूमि पूजन का लगाया आरोप

Kapilvastupost

शोहरतगढ़ विधायक विनय वर्मा ने डीएम को पत्र लिखकर पीडब्ल्यूडी पर बिना उनकी मौजूदगी के शिलान्यास/लोकार्पण व भूमि पूजन कार्यक्रम करवाने का लगाया आरोप। विधायक विनय वर्मा ने इस कार्य में विभाग ने गलत तरीके से उनके नाम का बोर्ड लगवाने का भी आरोप उन्होंने लगाया है। जबकि इसकी सूचना विभाग द्वारा उन्हें • नहीं दी जाती है। उन्होंने डीएम सिद्धार्थ नगर से जांच के उपरांत कार्रवाई करने का निवेदन किया है अन्यथा वह इस मामले को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष उठाएंगे। – विधानसभा क्षेत्र शोहरतगढ़ के बढ़नी में पीडब्ल्यूडी विभाग ने गत 30 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय सीमा मार्ग के कारण योजना के अंतर्गत बढ़नी रेलवे फीडर मागों के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण योजना के तहत बढ़नी रेलवे फीडर मार्ग के चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण कार्य का शिलान्यास करवाया गया था।

जिसमें लगे शिलापट्ट परडुमरियागंज सांसद जगदंबिका पाल के द्वारा शोहरतगढ़ विधायक विनय वर्मा की मौजूदगी में करवाया जाना अंकित है। जिसकी सूचना मिलते ही शोहरतगढ़ विधायक विनय वर्मा ने डीएम को पत्र लिखकर पीडब्ल्यूडी के ऊपर फर्जी तरीके से शिलापट्ट लगवाने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि गत 30 अक्टूबर को वह दिल्ली थे और उसी समय उनकी उपस्थिति इस कार्यक्रम में भला कैसे हो सकती थी।

उन्होंने पीडब्ल्यूडी विभाग से डीएम के माध्यम से पूछा कि उक्त शिलान्यास /भूमिपूजन कार्यक्रम का वीडियो फोटो अगर उनके पास उपलब्ध है तो वह मुझे दिखाएं जिसमें मैं मौजूद

था। उन्होंने डीएम से इस मामले में जांच करवरकर कड़ी कार्रवाई करने का निवेदन किया और अल्टीमेटम दिया कि अगर इस मामले की जांच नहीं हुई तो मैं विधानसभा अध्यक्ष के सामने विधानसभा में इस मामले को उठाऊंगा।

इसके अलावा एक दूसरे पत्र में उन्होंने डीएम से मांग किया कि वह अपने अधीन विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया करें कि बिना जांच के उपरांत किसी भी प्रकार का भुगतान पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड या प्रांतीय खंड के अधिकारियों द्वारा ना किया जाए। क्योंकि मेरी जानकारी में है कि पीडब्ल्यूडी के विभागीय अधिकारियों से सांठ-गांठ कर ठेकेदारों द्वारा नियमों को तोड़ मरोड़ कर अपने भुगतान कराए जाने का प्रयास किया जा रहा है।

इस संबंध में विधायक ने कहा है कि जब तक स्थलीय निरीक्षण ना हो जाए तब तक भुगतान न किया जाए। निरीक्षण के बाद कार्य सही पाए जाने के बाद ही सभी ठेकेदारों का भुगतान वरीयता के अनुसार कर दिया जाए।