📅 Published on: September 27, 2024
साहबों की रहमोंकरम पर मौज काट रहे हैं शिक्षा माफिया साहबों और शिक्षा माफियाओं के बीच कहीं सुविधा शुल्क अहम किरदार तो नहीं
सुनील श्रीवास्तव
सिद्धार्थनगर। जिले की शिक्षा व्यवस्था की घोर लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही है। शिक्षा विभाग अपने विभिन्न प्रकार के कारनामों से लगातार बदनामी की लकीरों में कैद रहता है। तो ऐसे में इन दिनों जिले में संचालित अधिकांश मदरसा एवं प्राइवेट विद्यालयों में योग्यता को दरकिनार कर जिम्मेदारों की मेहरबानी से अयोग्य लोग बच्चों को शिक्षा ग्रहण कर आ रहे हैं।
गौरतलब हो कि मदरसा एवं प्राइवेट विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण कराने वाले शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता स्नातक एवं मदरसा में आलिम या उर्दू से इंटरमीडिएट अथवा उसके समकक्ष कोई प्रमाण पत्र होना आवश्यक है। लेकिन प्राइवेट विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था को भ्रष्टाचार अपनी गिरफ्त में इस कदर ले लिया है कि अधिकांश विद्यालयों में अयोग्य लोग शिक्षा ग्रहण करवाते नजर आ रहे हैं।
आपको बता दें कि इटवा क्षेत्र के बहुत से प्राइवेट विद्यालयों का रजिस्ट्रेशन भी नहीं है लेकिन धड़ल्ले से मजाक काट रहे हैं स्कूल के प्रबंधक। बताते चलें कि सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक शिक्षा विभाग की घोर लापरवाही की वजह से देश के कर्णधार कहे जाने वाले बच्चों के भविष्य को पलीता लग रहा है।
तो है दूसरी तरफ जिले की शिक्षा व्यवस्था पर तरह- तरह के सवाल उठना लाजमी है। सूत्रों के अनुसार शासनादेश को नजरअंदाज कर अधिकांश मदरसा एवं प्राइवेट संचालक शिक्षा विभाग के योग्यता नियमव कानून की धज्जियां उड़ाते हैं।
बताते चलें कि इन अयोग्य लोगों के पास मात्र कक्षा 5 व कक्षा 8 तक की ही योग्यता होती है और यह इसी योग्यता के सहारे बच्चों के भविष्य को संवारने का काम करते हैं। सबसे अहम सवाल यह है कि शिक्षा ग्रहण कराने के लिए मदरसा एवं प्राइवेट विद्यालय व्यवस्थापक कम पैसों में ऐसे अयोग्य लोगों को रखते हैं |
और चंद पैसों के लिए यह अयोग्य लोग छात्रों के भविष्य को पलीता लगाने में जरा सा भी गुरेज नहीं करते हैं और शिक्षा विभाग में बैठे लोग सुविधा शुल्क की वजह से इन विद्यालय व्यवस्थापकों के आगे नतमस्तक बने रहते हैं।
भरोसेमंद सूत्रों की माने तो इटवा और डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में ऐसे प्राइवेट विद्यालयों की भरमार है जिसमें अयोग्य लोग शिक्षा ग्रहण कराने का कार्य कर रहें हैं। उन्हीं अयोग्य लोगों के सहारे मदरसा एवं प्राइवेट विद्यालयों संचालित हो रहा है।
शायद यह कहना गलत ना होगा कि शिक्षा विभाग की संरक्षण में छात्रों के भविष्य को पलीता लग रहा है और जिम्मेदार सुविधा शुल्क की वजह से कुंभकर्णी नींद में सो रहे हैं। अब देखना है कि जिम्मेदारों की उदासीनता से बच्चों की भविष्य को कब तक पलीता लगता रहेगा।