📅 Published on: October 10, 2024
विडियो सोसल मीडिया पर हुआ वायरल। वसुधैव कुटुम्बकम की निकली हवा , मुस्लिम विरोध में ही चलती सबकी दुकान
सरताज आलम
आज गुरुवार को डुमरियागंज विधानसभा की एक मुस्लिम विधायक द्वारा क्षेत्र की प्रसिद्ध गालापुर मंदिर में आयोजित फलाहार कार्यक्रम के विरोध में हिंदू युवा वाहिनी कार्यकर्ताओं का विरोध कई महत्वपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक प्रश्न खड़ा करता है। इस घटना ने सांप्रदायिक सौहार्द, धार्मिक सहिष्णुता और हिंदू संस्कृति के मूल्यों पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है।
सांप्रदायिक सौहार्द और सहिष्णुता का सवाल
भारत विविधता में एकता के सिद्धांत पर आधारित है, जहां विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के लोग साथ मिलकर रहते हैं। जब कोई मुस्लिम विधायक, जो जनता द्वारा चुना गया प्रतिनिधि है, एक मंदिर में फलाहार कार्यक्रम में हिस्सा लेने का निर्णय करता है, तो यह सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक माना जा सकता है। यह कदम धार्मिक सीमाओं को तोड़ने और आपसी विश्वास बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास हो सकता है। ऐसे में, विरोध करने से यह संदेश जाता है कि समाज के कुछ हिस्से अब भी धार्मिक सहिष्णुता को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।
मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक केंद्र भी हैं, जहां समाज के विभिन्न वर्गों के लोग एक साथ आते हैं। भारत के संविधान और संस्कृति दोनों ही सभी धर्मों के लोगों को सार्वजनिक स्थानों और धार्मिक गतिविधियों में समान रूप से भाग लेने का अधिकार देते हैं। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच समझ और सम्मान को बढ़ावा मिल सकता है।
हिंदू संस्कृति और व्यापक दृष्टिकोण
हिंदू धर्म की परंपरा और संस्कृति बेहद समावेशी रही है। इसका मूल भाव “वसुधैव कुटुम्बकम” (सारा विश्व एक परिवार है) पर आधारित है, जो समावेशिता, सहिष्णुता और सभी जीवों के प्रति प्रेम सिखाता है। हिंदू धर्म में अहिंसा, सभी धर्मों के प्रति सम्मान और सह-अस्तित्व की भावना को उच्च प्राथमिकता दी जाती है।
जब कोई अन्य धर्म का व्यक्ति हिंदू मंदिर में आकर फलाहार या अन्य धार्मिक गतिविधियों में हिस्सा लेता है, तो इसे धर्म और संस्कृति के बीच एक सेतु के रूप में देखा जा सकता है, जो सह-अस्तित्व और परस्पर सम्मान की भावना को बढ़ावा देता है।
विरोध के पीछे सीधी राजनीती
हिंदू युवा वाहिनी द्वारा किया गया विरोध शायद कुछ गहरे राजनीतिक या सांप्रदायिक उद्देश्यों से प्रेरित है। कुछ संगठनों या समूहों द्वारा ऐसा मानना हो सकता है कि धार्मिक स्थलों पर गैर-हिंदू व्यक्तियों की उपस्थिति या सहभागिता धार्मिक अस्मिता को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, ऐसा मानना हिंदू धर्म की समृद्ध और सहिष्णु परंपरा के विपरीत है।
विरोध प्रदर्शन इस बात को भी उजागर करता है कि समाज के कुछ हिस्से अब भी धार्मिक और सांस्कृतिक सामंजस्य को लेकर अनिश्चित और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इस प्रकार के विरोध से सामाजिक विभाजन और धार्मिक ध्रुवीकरण की प्रवृत्तियों को बल मिल सकता है, जो देश की एकता और अखंडता के लिए हानिकारक हो सकता है।
मुस्लिम विधायक द्वारा मंदिर में फलाहार कार्यक्रम का विरोध इस बात का संकेत है कि आज भी कुछ लोग धार्मिक सीमाओं के पार जाने वाले ऐसे प्रयासों को स्वीकार करने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं।
यह घटना सांप्रदायिक सौहार्द और हिंदू धर्म की सहिष्णुता के परीक्षण के रूप में देखी जा सकती है। अगर समाज सभी धर्मों और समुदायों के प्रति खुलापन और सम्मान का भाव रखे, तो यह देश को धार्मिक और सामाजिक एकता की ओर अग्रसर करने में सहायक होगा। लेकिन ऐसा नहीं है हिन्दू समाज को मुस्लिम से हर संभव दूर रखने का प्रयास उनके बीच खाई / दरार बढ़ने का काम हो रहा है |
डुमरियागंज की सपा विधायक सैय्यदा खातून के द्वारा गालापुर मन्दिर में फलाहार कार्यक्रम का भाजपा हिन्दु युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया।
वहीं फलाहार कार्यक्रम को गुरुवार को कार्यकर्ताओं ने विरोध विडियो सोसल मीडिया पर वायरल कर दिया। आपको बता दें कि डुमरियागंज विधानसभा की सपा विधायक सैय्यदा खातून के द्वारा फलाहार कार्यक्रम रखा गया था।
विधायक सैय्येदा खातून कई वर्षों से फलाहार कार्यक्रम कर हिन्दू समाज को जोड़ने का करती रही हैं प्रयास |
भाजपा हिन्दू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं से और सपा विधायक सैय्यदा खातून के समर्थको हुई तीखी नोक-झोंक हो गया, जिसका विडियो सोसल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
वायरल विडियो में खुद सपा की सैय्यदा खातून दिख रही है। वायरल वीडियो डुमरियागंज के गालापुर मन्दिर का गुरुवार का बताया जा रहा है।