मनरेगा में करोड़पति बनने का खेल: देईपार में एक ही काम को दो आईडी से ठगे 7.91 लाख, प्रधान-सचिव पर भ्रष्टाचार का आरोप

Niyamtullah khan

सिद्धार्थनगर। विकास खंड डुमरियागंज के ग्राम पंचायत देईपार में मनरेगा योजना के तहत बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। एक ही खुदाई कार्य को दो अलग-अलग आईडी पर दर्ज कर ग्राम प्रधान समेत चार लोगों ने 7.91 लाख रुपये का सरकारी गबन किया। लोकपाल ने जांच रिपोर्ट में कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

जांच लोकपाल मनरेगा को देईपार निवासी जंगल प्रसाद उर्फ जगराम की शिकायत पर शुरू हुई। सत्यापन और संबंधित लोगों के बयानों से स्पष्ट हुआ कि भट्टा पोखरा की खुदाई और संतराम के बाग के सामने गड्ढा खुदाई—दोनों परियोजनाएं वास्तव में एक ही हैं। फिर भी इन्हें दो अलग आईडी पर दिखाकर फर्जी बिलिंग की गई।

लोकपाल की रिपोर्ट के अनुसार, पांच वर्ष की अनिवार्य अवधि पूरी किए बिना ही दूसरी आईडी बनाई गई और जमीन पर कोई काम नहीं हुआ। वर्तमान ग्राम प्रधान इंद्रावती, ग्राम पंचायत सचिव हरिशंकर सिंह, तकनीकी सहायक ओमप्रकाश और ग्राम रोजगार सेवक राजकुमार पर आपसी मिलीभगत कर कूट रचित अभिलेख तैयार करने का आरोप है। कुल 7,91,328 रुपये की धनराशि का गबन किया गया।

लोकपाल सुधीर पांडेय ने रिपोर्ट में निर्देश दिए हैं कि गबन की पूरी राशि ग्राम प्रधान, सचिव और तकनीकी सहायक से समानुपातिक वसूली कर राजकीय कोष में जमा की जाए। साथ ही, सभी आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत करने के आदेश जारी हुए हैं।

ग्रामीणों में इस खुलासे से भारी आक्रोश फैल गया है। वे शासन से तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मनरेगा जैसी गरीब कल्याणकारी योजना में इस तरह का भ्रष्टाचार ग्रामीण विकास को पटरी से उतार रहा है। जिला प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है।