भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी स्वच्छता: बढ़नी ब्लॉक में एडीओ पंचायत कार्यालय बना ‘खेल’ का अड्डा

गुरू जी की कलम से
सिद्धार्थनगर: जनपद के विकास खंड बढ़नी से भ्रष्टाचार और मनमानी का एक बड़ा मामला सामने आ रहा है। सूत्रों के अनुसार, एडीओ पंचायत कार्यालय में नियमों को ताक पर रखकर परिवार रजिस्टर में हेरफेर से लेकर सफाई कर्मियों के शोषण तक का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। आलम यह है कि सरकारी कागजों में जो सफाई कर्मी गांवों की सूरत बदलने के लिए तैनात हैं, वे असल में कार्यालयों में ‘बाबू’ बनकर कुर्सी तोड़ रहे हैं।

परिवार रजिस्टर और प्रमाण पत्रों में ‘खेल’ जारी

शिकायत है कि कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से परिवार रजिस्टर की नकल और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों में मनचाहा फेरबदल किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि यहाँ कुछ भी असंभव नहीं है, बस ‘साहब’ की रजामंदी होनी चाहिए। सरकारी अभिलेखों के साथ हो रही यह छेड़छाड़ भविष्य में बड़े विवादों का कारण बन सकती है।

सफाई व्यवस्था चौपट, सफाई कर्मी बने ‘नेता और ऑपरेटर’
स्वच्छ भारत मिशन को ठेंगा दिखाते हुए बढ़नी ब्लॉक के कई सफाई कर्मी अपनी मूल ड्यूटी छोड़कर अन्य कार्यों में मशगूल हैं:
* कुर्सी का मोह: कई सफाई कर्मी फील्ड में झाड़ू लगाने के बजाय पंचायत कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर और बाबू बनकर काम कर रहे हैं।
* प्राइवेट सफाईकर्मी: कुछ रसूखदार सफाई कर्मियों ने अपनी जगह सफाई के लिए प्राइवेट लोग रख छोड़े हैं, जो सिर्फ खानापूर्ति करते हैं।
* नेतागीरी का शौक: साहब के संरक्षण में कुछ कर्मचारी ‘प्रधान प्रतिनिधि’ बनकर राजनीति चमका रहे हैं और बिना काम किए मुफ्त की तनख्वाह उठा रहे हैं।
शोषण का शिकार हो रहे कर्मठ कर्मचारी
ग्राम प्रधानों और कुछ कर्मचारियों ने दबी जुबान में बताया कि जो सफाई कर्मी गांवों में ईमानदारी से काम करते हैं, उन्हें डराने और शोषण करने के लिए बिना किसी ठोस कारण के स्थानांतरण (Transfer) कर दिया जाता है। अधिकारियों की इस मनमर्जी से कर्मचारियों में भारी असंतोष है।
गांवों में बीमारियों का खतरा
सफाई व्यवस्था ध्वस्त होने के कारण गांवों में:
* नालियां चोक हैं और सड़कों पर गंदा पानी बह रहा है।
* जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं।
* आम जनता स्वयं नालियां साफ करने को मजबूर है, जिससे संक्रामक बीमारियां फैलने का डर बना हुआ है।
अधिकारी मौन: इस पूरे प्रकरण पर जब डीपीआरओ (DPRO) और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) के सरकारी नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की गई, तो फोन रिसीव नहीं हुआ। शासन की चुप्पी इस अव्यवस्था पर और भी बड़े सवाल खड़े करती है।