क्यों 60 के बाद बढ़ जाता है किडनी फेलियर का जोखिम? जोखिम और बचाव पर डॉ बदरे आलम खान से चर्चा

विशेष रिपोर्ट: साइलेंट किलर बन रही किडनी की बीमारी, 60 की उम्र पार बुजुर्गों के लिए ‘eGFR’ टेस्ट बना सुरक्षा कवच

Nizam Ansari

​सिद्धार्थ नगर| 5 जनवरी, 2026 उत्तर प्रदेश की बदलती जीवनशैली और मधुमेह (Diabetes) के बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ बदरे आलम खान ने बुजुर्गों के लिए एक गंभीर चेतावनी जारी की है। 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों में किडनी की कार्यक्षमता का कम होना एक ‘स्वाभाविक प्रक्रिया’ तो है, लेकिन समय रहते eGFR और ACR जैसे टेस्ट की अनदेखी करना घातक साबित हो सकता है।

​1. क्यों 60 के बाद बढ़ जाता है किडनी फेलियर का जोखिम?

​डॉ बदरे आलम के अनुसार, 30 से 40 वर्ष की आयु के बाद हमारी किडनी की छानने की क्षमता (Filtration) प्रति वर्ष लगभग 1% कम होने लगती है। जब कोई व्यक्ति 60 की दहलीज पार करता है, तो यह गिरावट तेजी पकड़ सकती है।

उम्र का प्रभाव: उम्र बढ़ने के साथ किडनी की कोशिकाएं (Nephrons) कम होने लगती हैं।

सॉफ़्ट टारगेट: मधुमेह (Sugar) और उच्च रक्तचाप (BP) से पीड़ित बुजुर्गों में किडनी फेलियर का खतरा सामान्य से 3 गुना अधिक होता है।

दवाओं का दुष्प्रभाव: बिना डॉक्टरी सलाह के ली गई दर्द निवारक दवाएं बुजुर्गों की किडनी पर सीधा प्रहार करती हैं।

​2. eGFR: वह पैमाना जो बताएगा आपकी किडनी की असली उम्र सिर्फ ‘क्रिएटिनिन’ (Creatinine) देखना काफी नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी की सेहत का असली पैमाना eGFR (Estimated Glomerular Filtration Rate) है।

3. इन 5 शुरुआती संकेतों को ‘बुढ़ापा’ समझकर न छोड़ें

​किडनी की बीमारी की सबसे खतरनाक बात यह है कि 90% क्षति होने तक कोई गंभीर लक्षण नहीं दिखता। फिर भी, शरीर ये छोटे संकेत देता है:

पेशाब में बदलाव: झाग आना (प्रोटीन लीक होना), रात में बार-बार पेशाब आना या रंग गहरा होना।

सूजन (Edema): सुबह उठने पर आंखों के नीचे भारीपन और शाम तक पैरों/टखनों में सूजन।

अत्यधिक थकान: खून की कमी (Anemia) के कारण हर वक्त कमजोरी महसूस होना।

त्वचा में खुजली: शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने से त्वचा में रूखापन और खुजली होना।

भूख की कमी: खाने का स्वाद बिगड़ना और जी मिचलाना।

​4. सुरक्षा मंत्र: बुजुर्गों के लिए ‘प्रिवेंटिव हेल्थ’ गाइड

​जे जे हॉस्पिटल सिद्धार्थ नगर के एडवांस यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉक्टर बदरे आलम का सुझाव है कि 60+ आयु वर्ग को अपनी जीवनशैली में ये 4 बदलाव तुरंत करने चाहिए:

सालाना ‘किडनी प्रोफाइल’ टेस्ट: साल में एक बार eGFR, सीरम क्रिएटिनिन और मूत्र ACR (Albumin-to-Creatinine Ratio) जांच जरूर कराएं।

नमक और प्रोटीन पर नियंत्रण: आहार में नमक की मात्रा कम करें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही प्रोटीन लें।

हाइड्रेशन का संतुलन: न बहुत कम पानी पिएं, न ही बहुत ज्यादा। अपनी शारीरिक जरूरत के अनुसार पानी का स्तर बनाए रखें।

ब्लड प्रेशर कंट्रोल: बुजुर्गों के लिए BP को 130/80 mmHg के करीब रखना किडनी की लंबी उम्र के लिए अनिवार्य है।

जे जे हॉस्पिटल के एम.सीएच (यूरोलॉजी) एवं किडनी प्रत्यारोपण सर्जन डॉ बदरे आलम बताते हैं कि जनपद सिद्धार्थ नगर में मधुमेह के बढ़ते मरीज एक गंभीर महामारी है। यदि आप 60 के पार हैं और शुगर के मरीज हैं, तो हर 6 महीने में अपनी किडनी की जांच कराएं। शुरुआती पहचान ही डायलिसिस से बचने का एकमात्र रास्ता है।