सिद्धार्थनगर: बढ़नी-पचपेड़वा के बीच मड़नी गांव में भारी पुलिस बल की तैनाती में अंडरपास निर्माण शुरू, ग्रामीणों में आक्रोश

विकास और जनहित के बीच का यह संघर्ष अब तूल पकड़ चुका है। यदि तकनीकी खामियों को दूर किए बिना अंडरपास का निर्माण होता है, तो आने वाले मानसून में मड़नी गांव के हजारों लोगों का संपर्क बाहरी दुनिया से कट सकता है।

गुरु जी की कलम से 

बढ़नी (सिद्धार्थनगर): पूर्वोत्तर रेलवे के बढ़नी और पचपेड़वा स्टेशनों के बीच स्थित समपार फाटक संख्या 90C को बंद कर अंडरपास बनाने का विवाद गहरा गया है। प्रशासन ने ग्रामीणों के विरोध को दरकिनार करते हुए भारी पुलिस बल (पुलिस छावनी) की मौजूदगी में निर्माण कार्य शुरू करा दिया है। जहां रेलवे इसे विकास का हिस्सा मान रहा है, वहीं ग्रामीण इसे भविष्य की ‘बड़ी मुसीबत’ करार दे रहे हैं।

पुलिस छावनी में तब्दील हुआ इलाका, ग्रामीणों में दहशत

जब स्थानीय ग्रामीणों ने अंडरपास निर्माण पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और विरोध प्रदर्शन करना चाहा, तो प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया। परगना अधिकारी शोहरतगढ़ के नेतृत्व में भारी पुलिस बल और RPF की तैनाती कर पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया। पुलिस की बड़ी संख्या देखकर ग्रामीण पीछे हटने को मजबूर हो गए, जिसके तुरंत बाद जेसीबी और डंपरों ने खुदाई का काम शुरू कर दिया।

अंडरपास से ग्रामीणों को क्यों है आपत्ति? (प्रमुख समस्याएं)

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर को पत्र सौंपकर अपनी व्यथा बताई है। उनके विरोध के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • जलजमाव का डर: क्षेत्र में भू-गर्भ जल स्तर (Water Level) काफी ऊपर है। ग्रामीणों के अनुसार, रेलवे ने खुद अप्रैल में जांच की थी जिसमें पानी मात्र 6 फीट पर मिला था। बरसात में अंडरपास तालाब बन जाएगा।

  • बाढ़ का खतरा: पास ही चरगहवां नदी बहती है। तटबंध न होने के कारण नेपाल से आने वाला पानी गांव में घुस जाता है। एकमात्र निकास मार्ग (फाटक) बंद होने और अंडरपास में पानी भरने से पूरा गांव टापू बन जाएगा।

  • कृषि पर संकट: रेलवे 12 फीट ऊंचा अंडरपास बना रहा है, जबकि आधुनिक खेती के लिए जरूरी कंबाइन मशीन की ऊंचाई लगभग 14 फीट होती है। ऐसे में किसानों के लिए फसल कटाई की मशीनें ले जाना असंभव होगा।

  • शिक्षा और आस्था पर चोट: फाटक के दक्षिण स्थित मडनी डीहवा के बच्चे प्राथमिक विद्यालय जाने से वंचित हो जाएंगे। साथ ही, कब्रिस्तान तक जाने वाला रास्ता भी इस निर्माण के कारण प्रभावित होगा।

जनप्रतिनिधियों से नहीं मिली राहत, अब न्यायालय से आस

ग्राम प्रधान प्रतिनिधि जमील ने बताया कि उन्होंने स्थानीय प्रशासन से लेकर डीएम, विधायक और सांसद तक गुहार लगाई, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों ने उनकी समस्याओं को अनदेखा किया है। अब ग्रामीण कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।

प्रशासन का पक्ष: जानकारों का कहना है कि निर्माण रेलवे की अपनी भूमि पर हो रहा है और किसी भी न्यायालय से स्थगन आदेश (Stay Order) नहीं है। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए ही पुलिस बल तैनात किया गया।