बांसी – एक डॉक्टर, पाँच अस्पताल: सिद्धार्थनगर स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से मरीजों की जान आफत में
📅 Published on: January 16, 2026
Kapilvastupost
सिद्धार्थनगर: जनपद के स्वास्थ्य महकमे में एक बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। यहाँ कागजों पर तो डॉक्टर मौजूद हैं, लेकिन हकीकत में अस्पताल अप्रशिक्षित झोलाछाप चला रहे हैं। एक ही डॉक्टर के रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) पर चार से पांच अस्पताल और पैथोलॉजी सेंटर धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं, जो सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ है।
कागजों पर ‘सुपरमैन’ बने डॉक्टर
मामला तब गरमाया जब यह पता चला कि कई डॉक्टर एक ही समय में अलग-अलग शहरों के अस्पतालों में ‘फुल टाइम’ उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर:
* डॉ. मनीष कुमार: इनके पंजीकरण पर बांसी के आर्यनगर, अशोकनगर और धानी रोड स्थित दो पैथोलॉजी सेंटर और दो अस्पताल चल रहे हैं।
* डॉ. चौधरी नासिर हुसैन: इनका नाम इटवा और डुमरियागंज रोड स्थित केंद्रों पर एक साथ दर्ज है।
* डॉ. बलेंद्र सिंह सोंढी, डॉ. सौरभ गुप्ता, डॉ. ममता रानी, डॉ. मनोज कुमार राय और डॉ. अभिषेक पांडेय: इन सभी के नामों का उपयोग भी एक से अधिक क्लीनिकों और डायग्नोस्टिक सेंटरों को चलाने के लिए किया जा रहा है।
भ्रष्टाचार का खेल और स्वास्थ्य विभाग पर सवाल
आरटीआई (RTI) कार्यकर्ता डॉ. देवेश मणि त्रिपाठी की शिकायत के बाद इस बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं है।
शिकायत में कहा गया है कि पिछले तीन वर्षों में निजी अस्पतालों की लापरवाही से 12 से अधिक मौतें हो चुकी हैं, लेकिन विभाग ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) डॉ. रजत चौरसिया ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा है कि नोडल अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई डॉक्टर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाता है, तो संबंधित क्लीनिक का लाइसेंस निरस्त कर अस्पताल को सील कर दिया जाएगा।
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