सिद्धार्थनगर: विकास के नाम पर सरकारी धन का बंदरबांट, भंवारी ग्राम पंचायत में ₹8.97 लाख का ‘गोलमाल’

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सिद्धार्थनगर। भ्रष्टाचार की जड़ें ग्राम पंचायतों में किस कदर गहरी हो चुकी हैं, इसका ताजा उदाहरण विकास खण्ड-बासी की ग्राम पंचायत भंवारी में देखने को मिला है। यहाँ प्रधान और सचिव की जुगलबंदी ने सरकारी खजाने को 8 लाख 97 हजार 814 रुपये की चपत लगा दी है।

ऑडिट रिपोर्ट में इस भारी गबन का खुलासा होने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

ऑडिट रिपोर्ट ने खोली पोल, अधिकारियों के रडार पर ‘साहब’ और ‘प्रधान’
वर्ष 2022-23 की ऑडिट रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं का कच्चा चिट्ठा सामने आया है। ज्येष्ठ लेखा परीक्षक और सहायक निदेशक (सहकारी समितियां एवं पंचायत) की जांच में पाया गया कि विकास कार्यों के नाम पर निकाली गई भारी-भरकम राशि का कोई ठोस हिसाब-किताब नहीं है। ऑडिट रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव को इस गबन के लिए संयुक्त रूप से दोषी माना गया है।

जिलाधिकारी का कड़ा रुख: 15 दिन में जवाब दें वरना होगी कुर्की
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए संबंधित पक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। 25 फरवरी को जारी इस नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि:
* 15 दिनों के भीतर साक्ष्यों सहित संतोषजनक जवाब प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
* यदि जवाब नहीं दिया गया या वह असंतोषजनक पाया गया, तो गबन की गई राशि के 50 प्रतिशत भाग की वसूली भू-राजस्व के बकाये की भांति (कुर्की की तर्ज पर) की जाएगी।
* यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश पंचायत राज नियमावली 1947 के नियम 256, 257 व 259 के तहत अमल में लाई जाएगी।
सवालों के घेरे में तंत्र: क्या केवल वसूली ही काफी है?
ग्रामीण इलाकों में विकास के लिए आने वाला पैसा जब अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों की जेब में जाता है, तो सवाल उस निगरानी तंत्र पर भी उठता है जो इसे समय पर रोकने में विफल रहता है। भंवारी ग्राम पंचायत का यह मामला महज एक बानगी है। जनता अब यह देख रही है कि क्या प्रशासन केवल नोटिस देकर खानापूर्ति करेगा या इन भ्रष्ट चेहरों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई कर जेल की सलाखों के पीछे भेजेगा।