📅 Published on: March 9, 2026
Kapilvastupost
सिद्धार्थनगर (बढ़नी): जनपद को कागजों में ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) घोषित किया जा चुका है, लेकिन धरातल पर हकीकत इसके उलट है। बढ़नी ब्लॉक के ग्राम पंचायत अर्री में लाखों रुपये की लागत से बना सामुदायिक शौचालय सफेद हाथी साबित हो रहा है। आलम यह है कि जिस भवन को स्वच्छता के लिए बनाया गया था, वहां अब ग्रामीण अपनी बकरियां बांध रहे हैं, जबकि ग्रामीण आज भी खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।
ताले में बंद विकास, केयर टेकर को घर बैठे मानदेय
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, शौचालय के दरवाजे पर महीनों से ताला लटका रहता है। संचालन की जिम्मेदारी जिस स्वयं सहायता समूह को दी गई है, वह पूरी तरह निष्क्रिय है। आरोप है कि केयर टेकर बिना काम किए हर महीने सरकारी मानदेय डकार रही है, जबकि ग्रामीण सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
बदहाली का मंजर: न पानी, न सफाई
शौचालय परिसर में अव्यवस्थाओं का अंबार लगा है:
* खराब हैंडपंप: परिसर में लगा देशी नल पिछले एक साल से खराब पड़ा है, जिससे पानी की बूंद तक मयस्सर नहीं है।
* टूटी टंकियां: मल निस्तारण टैंक का ढक्कन टूटा हुआ है, जिससे हादसे का डर बना रहता है।
* चारों ओर गंदगी: सफाई के अभाव में शौचालय के चारों तरफ झाड़ियां और गंदगी फैली हुई है।
अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल
लाखों के सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और स्वच्छ भारत मिशन की धज्जियां उड़ते देख भी संबंधित अधिकारी मौन धारण किए हुए हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस शौचालय की जांच कराकर इसे अविलंब क्रियाशील बनाया जाए और दोषी समूह व लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।