बढ़नी सीमा पर तस्करों के हौसले बुलंद: सुस्त तंत्र और खुली सीमा का उठा रहे फायदा, युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में

गुरु जी की कलम से
बढ़नी/सिद्धार्थनगर:
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बढ़नी क्षेत्र इन दिनों तस्करी का सुरक्षित चारागाह बन गया है। जिम्मेदार विभागों के कथित सुस्त रवैए के कारण तस्कर बेखौफ होकर पगडंडियों के रास्ते अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं। नगर पंचायत बढ़नी के पुरानी पुलिस चौकी, चमनगंज, आजाद नगर और मलगहिया जैसे इलाकों से रोजाना लाखों का सामान इधर से उधर किया जा रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा पसरा है।

इन रास्तों से हो रहा अवैध खेल
सूत्रों के मुताबिक, तस्करी का यह नेटवर्क पुरानी पुलिस चौकी के साथ-साथ कल्लन डिहवा, घरुआर, मड़नी, सेमरहवा और आजाद नगर के रास्तों से संचालित हो रहा है। खुली सीमा का लाभ उठाकर तस्कर कपड़ा, कंबल, कॉस्मेटिक, इलेक्ट्रॉनिक सामान, मोटर पार्ट्स, खाद-बीज और मोबाइल फोन की धड़ल्ले से तस्करी कर रहे हैं।

स्मैक का काला कारोबार: बर्बाद हो रही युवा पीढ़ी
सबसे चिंताजनक पहलू स्मैक और अन्य नशीले पदार्थों की बढ़ती तस्करी है। बढ़नी क्षेत्र में स्मैक का काला कारोबार भारत से लेकर नेपाल तक जड़ें जमा चुका है। इस नशे की चपेट में आकर सीमावर्ती क्षेत्रों की युवा पीढ़ी तेजी से बर्बादी की ओर बढ़ रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सब कुछ जानते हुए भी जिम्मेदार अधिकारी इस ओर से आंखें मूंदे हुए हैं।

प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
ढेबरुआ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इन इलाकों में तस्करी का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इन पगडंडियों पर चौकसी नहीं बढ़ाई गई और जिम्मेदारों ने अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया, तो यह स्थिति आने वाले समय में सुरक्षा और सामाजिक ढांचे के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।