📅 Published on: April 2, 2026
Kapilvastupost
इटवा, सिद्धार्थनगर।
इटवा कस्बे में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा की गई निजी अस्पतालों की जांच एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बुधवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. संदीप द्विवेदी और नायब तहसीलदार राघवेन्द्र पाण्डेय ने दो अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया, लेकिन स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह कार्रवाई केवल एक दिखावा और औपचारिकता बनकर रह गई है।
अकलीमा हॉस्पिटल: होम्योपैथिक डॉक्टर के भरोसे जच्चा-बच्चा का इलाज
जांच टीम जब डुमरियागंज रोड स्थित अकलीमा हॉस्पिटल पहुंची, तो वहां स्थिति चौंकाने वाली थी। अस्पताल में कई गर्भवती महिलाएं भर्ती थीं, लेकिन उनका उपचार करने के लिए वहां कोई विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद नहीं था। पूरी व्यवस्था केवल एक बीएचएमएस (होम्योपैथिक) डॉक्टर के भरोसे चल रही थी।
* लापरवाही: एलोपैथिक मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए होम्योपैथिक पद्धति वाले केंद्र पर प्रसूति सेवाएं दी जा रही थीं।
* कार्रवाई: टीम ने केवल चेतावनी देकर औपचारिकता पूरी की और सख्त निर्देश दिए कि वहां केवल होम्योपैथिक पद्धति से ही इलाज किया जाए।
नाजिया क्लीनिक: बोर्ड तक मानकों के विपरीत
इसके बाद टीम बढ़नी रोड स्थित नाजिया क्लीनिक एंड मदर्स केयर पहुंची। यहां निरीक्षण के दौरान सन्नाटा पसरा मिला। अस्पताल का साइनबोर्ड भी स्वास्थ्य विभाग के मानकों के अनुरूप नहीं था। टीम को वहां कोई सक्रिय मरीज नहीं मिला, जिससे अस्पताल के संचालन की वैधता पर भी संदेह व्यक्त किया जा रहा है।
जनता का आरोप: कार्रवाई नहीं, सिर्फ ‘सेटिंग’ का खेल
स्थानीय लोगों में प्रशासन की इस ढुलमुल कार्यशैली को लेकर भारी आक्रोश है। कस्बे के लोगों का कहना है:
* दिखावे की जांच: हर बार जांच के नाम पर अधिकारी आते हैं, चेतावनी देते हैं और चले जाते हैं। ठोस कार्रवाई या अस्पताल सील करने जैसी प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती।
* आर्थिक शोषण: गली-मोहल्लों में बिना मानकों के चल रहे इन अस्पतालों में मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर उनका आर्थिक शोषण किया जा रहा है।
* विभागीय चुप्पी: मानकों के विपरीत चल रहे इन केंद्रों पर आखिर स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी क्यों है? क्या जिम्मेदार अधिकारी इन अवैध संचालकों को संरक्षण दे रहे हैं?
बताते चलें कि इटवा में निजी अस्पतालों की बढ़ती संख्या और कमजोर निगरानी व्यवस्था स्वास्थ्य सेवाओं की आड़ में एक बड़े खतरे की ओर इशारा कर रही है। यदि समय रहते निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो कभी भी कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है।