ईंधन संकट: ईरान-इजरायल युद्ध और क्रेडिट पॉलिसी में बदलाव ने बढ़ाई मुश्किलें, जिले के 3 पंप निलंबित

गुरु जी की कलम से 
सिद्धार्थनगर: वैश्विक स्तर पर ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब स्थानीय स्तर पर पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति पर दिखने लगा है। युद्ध की स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल उत्पादन और आयात पर गहरा प्रभाव पड़ा है। इसी बीच, तेल कंपनियों द्वारा अचानक बदली गई नीतियों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

क्रेडिट लिमिट खत्म होने से उपजा संकट
सूत्रों के अनुसार, ईंधन की किल्लत की एक बड़ी वजह IOCL (इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड) की क्रेडिट पॉलिसी में आया अचानक बदलाव है। अब तक पेट्रोल पंप मालिकों को तेल कंपनियों की तरफ से जो क्रेडिट (उधार) की सुविधा मिलती थी, उसे अचानक वापस ले लिया गया है। इस कारण पंप संचालकों के सामने अचानक 20 से 40 लाख रुपये की नकद राशि जुटाने की चुनौती खड़ी हो गई, जिससे वे तेल का नया स्टॉक (उठाव) नहीं कर पाए।

अफवाहों का बाजार गर्म: 5 घंटे में बिका 15 हजार लीटर तेल
ईंधन खत्म होने की अफवाहों ने जनता के बीच अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया। स्थिति यह रही कि जिन पंपों पर तेल उपलब्ध था, वहां मात्र 4 से 5 घंटों के भीतर 10 से 15 हजार लीटर तेल की एकमुश्त बिक्री दर्ज की गई।

सड़कों पर लगा वाहनों का लंबा हुजूम
जिले के पेट्रोल पंपों पर सुबह से ही भारी भीड़ देखी जा रही है। लोग कई-कई घंटों तक लाइनों में अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। कतारों में न केवल बाइक और कारें, बल्कि खेती-किसानी के लिए महत्वपूर्ण ट्रैक्टर, कंबाइन मशीन और ट्रालियों के साथ-साथ ट्रक और बसों का भी तांता लगा रहा।

प्रशासनिक कार्रवाई: इन तीन पंपों का अनुबंध रद्द
निर्देशों के बावजूद ईंधन का स्टॉक न करने और वितरण में सहयोग न करने पर जिलाधिकारी के आदेशानुसार निम्नलिखित पंपों के अनुबंध को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है:
* मेसर्स किसान सेवा केंद्र, हरिजोत इटवा
* मेसर्स सावित्री देवी बेचन लाल, सेखुई, डुमरियागंज
* मेसर्स अवध किसान सेवा केंद्र, मस्जिदिया, इटवा