दीनी और दुनियावी दोनों तालीम आज के दौर की अहम जरूरत: मौलाना गुलाम रसूल

सिद्धार्थनगर के दारुल उलूम गरीब नवाज में जलसे-ए-दस्तारबंदी का भव्य आयोजन; 55 छात्रों को मिली डिग्रियां

नियमतुल्लाह खान
डुमरियागंज, सिद्धार्थनगर: बैदौला चौराहा स्थित ‘दारुल उलूम अहले सुन्नत गरीब नवाज टेक्निकल इंस्टीट्यूट’ में शुक्रवार की रात सालाना ‘जलसे-ए-दस्तारबंदी’ और गरीब नवाज सेमिनार कॉन्फ्रेंस का आयोजन बेहद शान-ओ-शौकत के साथ किया गया। इस गौरवशाली अवसर पर मदरसे से अपनी शिक्षा पूरी करने वाले 55 छात्र-छात्राओं को फजीलत, आलमियत और हिफ्ज़-ओ-किरात की डिग्रियों व मेडल से नवाजा गया।
शिक्षा के लिए पीछे न हटें: पूर्व सांसद
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व सांसद मौलाना गुलाम रसूल बलियावी ने अपने संबोधन में शिक्षा की महत्ता पर जोर देते हुए कहा, “आज के प्रतिस्पर्धी युग में दीनी (धार्मिक) और दुनियावी (आधुनिक) दोनों तरह की शिक्षा अनिवार्य है। ज्ञान हासिल करने के लिए यदि हमें दूर का सफर भी करना पड़े, तो पीछे नहीं हटना चाहिए।”
समाज निर्माण में मदरसों की भूमिका
विशिष्ट अतिथि सैयद अब्दुल रब (चांद बाबू) ने लोगों के सवालों के तार्किक जवाब देते हुए नेक रास्ते पर चलने की हिदायत दी। वहीं, मौलाना निजामुद्दीन और मौलाना कमाल अख्तर ने कहा कि अब मदरसों का माहौल बदल रहा है और यहाँ से पढ़कर निकले बच्चे देश-दुनिया में नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से अपील की कि अभिभावक लड़के और लड़कियों की शिक्षा में भेदभाव न करें।
सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल
हाफिज अरबाब फारूकी ने इस्लाम के मोहब्बत और भाईचारे के संदेश को दोहराते हुए प्रयागराज कुंभ का जिक्र किया, जहाँ स्थानीय मुसलमानों ने श्रद्धालुओं के लिए अपने घर और मदरसे खोल दिए थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मैनेजर मौलाना मकसूद अकरम ने की और संचालन दिलशाद फारुकी ने किया। इस मौके पर विधायक सैय्यदा खातून, इरफान मलिक, नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि अतीकुर्रहमान, सरताज फारुकी सहित भारी संख्या में उलेमा और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।