खाद की किल्लत पर भड़के नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय: ‘सरकार अपनी कमियां छिपा रही, देश में खड़ा हो सकता है खाद्यान्न संकट’

 **ब्यूरो रिपोर्ट:** सिद्धार्थनगर **सिद्धार्थनगर।** उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और इटवा से विधायक माता प्रसाद पांडेय ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। सिद्धार्थनगर जिले में अपने आवास पर जनता की समस्याएं सुनने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने सरकार को ‘विलक्षण सरकार’ करार दिया। माता प्रसाद पांडेय ने आरोप लगाया कि यह सरकार अपनी किसी भी कमी को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं होती और इसका खामियाजा सीधे तौर पर देश के अन्नदाताओं को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा:  “प्रधानमंत्री मोदी का खुद बयान आया था कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण खाद का संकट उत्पन्न हो सकता है। इसके बावजूद सरकार ने समय रहते खाद की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की। आज जमीन पर खाद कहीं उपलब्ध नहीं है। किसान सहकारी समितियों और दुकानों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। यदि समय रहते आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में देश के सामने बड़ा खाद्यान्न संकट खड़ा हो सकता है।”

इनसाइड स्टोरी: आखिर क्यों गहराया है देश और यूपी में खाद का संकट? माता प्रसाद पांडेय के इस आरोप के बीच जब ग्राउंड रियलिटी और इनसाइड फैक्ट्स की पड़ताल की गई, तो सामने आया कि साल 2026 में खाद की किल्लत के पीछे कई बड़े वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं: *वैश्विक युद्ध और समुद्री रास्तों का ब्लॉक होना:** साल 2026 की शुरुआत से ही पश्चिम एशिया (पश्चिम एशिया संकट) में तनाव और **स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz)** के रास्ते में व्यवधान आने के कारण वैश्विक स्तर पर खाद का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा यहीं से आयात करता है। **कच्चे माल और गैस की आसमान छूती कीमतें:** घरेलू स्तर पर यूरिया बनाने के लिए **एलएनजी (LNG – लिक्विफाइड नेचुरल गैस)** की आवश्यकता होती है, जो इस अंतरराष्ट्रीय संकट की वजह से महंगी और कम हो गई है। इसके अलावा, डीएपी (DAP) बनाने के लिए जरूरी अमोनिया और सल्फर के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में $900 प्रति टन पार कर चुके हैं।

*चीन द्वारा निर्यात पर पाबंदी:** भारत में डीएपी और यूरिया की आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा चीन से आता था, लेकिन चीन ने अपने घरेलू स्टॉक को बचाने के लिए निर्यात पर सख्त प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिससे भारत में अचानक सप्लाई चेन टूट गई। * * बॉर्डर से सटे इलाकों में कालाबाजारी और पैनिक बाइंग:** खाद की कमी की खबरों के बीच स्थानीय डीलरों द्वारा कालाबाजारी (Black Marketing) और किसानों द्वारा डर के मारे जरूरत से ज्यादा खाद एडवांस में खरीद कर रख लेने (Panic Buying) की वजह से भी संकट और ज्यादा गहरा दिखाई दे रहा है। हालांकि, सरकार का दावा है कि उसके पास बफर स्टॉक मौजूद है और वह नए देशों (जैसे मोरक्को, जॉर्डन) से खाद आयात करने के लिए आपातकालीन टेंडर जारी कर रही है। विपक्ष के इन तीखे हमलों और जमीनी किल्लत के बीच अब देखना यह होगा कि सरकार आगामी खरीफ और रबी फसलों के सीजन से पहले किसानों तक खाद की सुचारू आपूर्ति कैसे सुनिश्चित करती है।