सिद्धार्थ नगर – बहुचर्चित संदीप हत्याकांड: फरार तीन आरोपियों के घर पुलिस ने चस्पा किया नोटिस, ढोल बजाकर कराई मुनादी
📅 Published on: June 28, 2026
निजाम अंसारी
*लोटन (सिद्धार्थनगर)।*
लोटन कोतवाली क्षेत्र के कोल्हुआ गांव में लगभग एक माह पहले हुए चर्चित संदीप यादव हत्याकांड में पुलिस ने फरार चल रहे तीन आरोपियों के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। न्यायालय के आदेश पर शनिवार को लोटन कोतवाली पुलिस ने तीनों आरोपियों के घरों पर धारा 84 बीएनएसएस (BNSS) के तहत नोटिस चस्पा किया और गांव में डुग्गी-मुनादी कराकर उन्हें जल्द हाजिर होने की चेतावनी दी।
दबंगों ने की थी संदीप की बेरहमी से हत्या
कोल्हुआ गांव के रहने वाले संदीप यादव (पुत्र शिवमूरत) की दबंगों ने बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इस सनसनीखेज वारदात के बाद से ही नामजद आरोपी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं और लगातार फरार चल रहे हैं।
सीजेएम कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई
लोटन कोतवाली प्रभारी हरिओम कुशवाहा ने बताया कि इस मामले में मुख्य रूप से तीन आरोपी फरार हैं, जिनके नाम इस प्रकार हैं: *रामअवध** (पुत्र सुखलाल) – निवासी गदहमरवा,
*रामजीत** (पुत्र काशी) – निवासी कोल्हुआ ,*भरत* (पुत्र प्रहलाद) – निवासी कोल्हुआ छोटकाडीह
इन तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191(2), 127(2), 115(2), 352, 351(3) और 105 के तहत मामला दर्ज है। आरोपियों के लगातार फरार रहने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट ने उन्हें अदालत में हाजिर करने का कड़ा निर्देश दिया था।
**क्या होती है धारा 84 BNSS की कार्रवाई?**
जब कोई आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए जानबूझकर छिपा रहता है, तो अदालत उसके खिलाफ उद्घोषणा (Proclamation) जारी करती है। इसके तहत आरोपी के घर और गांव के सार्वजनिक स्थान पर नोटिस चिपकाकर एक निश्चित समय के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया जाता है।
भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हुई मुनादी
न्यायालय के इसी आदेश के अनुपालन में शनिवार को लोटन कोतवाली पुलिस की टीम आरोपियों के गांवों में पहुंची। पुलिस ने ढोल (डुग्गी) बजवाकर पूरे गांव में मुनादी कराई और आरोपियों के घरों के बाहर नोटिस चस्पा किए।
इस कार्रवाई के दौरान उपनिरीक्षक (SI) रवीन्द्र यादव, हेड कांस्टेबल बृजभान यादव और महिला कांस्टेबल बबिता पासवान सहित भारी पुलिस बल मौजूद रहा। पुलिस प्रशासन का कहना है कि यदि आरोपी तय समय सीमा के भीतर कोर्ट या पुलिस के सामने हाजिर नहीं होते हैं, तो उनके खिलाफ आगे की कानूनी (कुर्की) कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

