📅 Published on: July 17, 2026
निजाम अंसारी
सिद्धार्थनगर (भनवापुर):
कहते हैं आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है, लेकिन हमारे देश में कुछ लोग ‘आपदा में अवसर’ तलाशने की कला में ज़्यादा माहिर हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला भनवापुर ब्लॉक के विशुनपुर औरंगाबाद गांव से सामने आया है, जहाँ करीब 200 किसानों की आजीविका पर एक नाविक की मनमानी भारी पड़ रही है। राप्ती नदी के उस पार अपने ही खेतों में जाने के लिए मजबूर किसानों के सामने नाविक ने ₹400 प्रतिदिन का किराया और पूरे साल का एडवांस भुगतान करने का फरमान सुना दिया है।
**धान की रोपाई पर मंडराया संकट, पुरानी व्यवस्था हुई ध्वस्त**
वर्तमान में धान की रोपाई का पीक सीजन चल रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर इन किसानों के पास राप्ती नदी पार करने के लिए नाव के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार, फसल तैयार होने पर किसान नाविक को तय मात्रा में अनाज (अंस) देते थे। लेकिन इस बार नाविक की नई और अड़ियल व्यवस्था ने किसानों की कमर तोड़ दी है। इतनी भारी रकम एडवांस में देना किसानों के बस की बात नहीं है, जिससे उनकी पूरे साल की आजीविका दांव पर लग गई है।
**पुल की मांग बरसों पुरानी, अब प्रशासन पर टिकी निगाहें**
ग्रामीण लंबे समय से राप्ती नदी पर एक पक्के पुल के निर्माण की मांग कर रहे हैं ताकि उन्हें इस रोज़-रोज़ के संकट से मुक्ति मिल सके। मामले की गंभीरता को देखते हुए नेता प्रतिपक्ष और इटवा विधायक माता प्रसाद पाण्डेय ने एसडीएम डुमरियागंज को पत्र लिखकर किसानों के लिए तुरंत सरकारी या वैकल्पिक नाव की व्यवस्था करने की मांग की है।
**क्या कहता है प्रशासन?**
“मामला हमारे संज्ञान में आया है। संबंधित नाविक से बातचीत की जा रही है। किसानों की समस्या का शीघ्र और उचित समाधान निकाला जाएगा ताकि उनकी खेती प्रभावित न हो।”*
**विवेकानंद मिश्र, एसडीएम**
**संपादकीय टिप्पणी “यह देश हमेशा से ही ‘आपदा में अवसर’ तलाशने के लिए बदनाम रहा है। जब-जब जनता लाचार होती है, कोई न कोई मजबूरी का फायदा उठाने बाज़ार में आ जाता है। हद तो यह है कि जो व्यवस्था सालों से अनाज के बदले आपसी तालमेल से चल रही थी, उसे भी व्यावसायिक लालच की भेंट चढ़ा दिया गया। एक तरफ किसान मौसम और मंदी से लड़ रहा है, तो दूसरी तरफ उसे अपनी ही ज़मीन पर जाने के लिए ‘जज़िया कर’ जैसी शर्तों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन को इस मनमानी पर तुरंत लगाम लगानी चाहिए, वरना इस बार अन्नदाता के घर चूल्हा जलना मुश्किल हो जाएगा।”