बुलडोजर एक्शन के खिलाफ पीस पार्टी की राज्यपाल से मांग: ‘मदरसों पर कार्रवाई से पहले हो निष्पक्ष जांच, सीधे बुलडोजर चलाना असंवैधानिक

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सिद्धार्थनगर। मदरसों को लेकर जारी विवाद और प्रशासनिक कार्रवाइयों के बीच पीस पार्टी ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल को संबोधित एक ज्ञापन सिद्धार्थनगर जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा है। पार्टी ने मदरसों के शैक्षिक और सामाजिक योगदान को रेखांकित करते हुए प्रशासनिक कार्रवाई से पहले निष्पक्ष जांच और वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग उठाई है।

मदरसों को संदेह की नजर से देखना बंद हो: कलीमुल्लाह फैजी

पीस पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं उलेमा कोऑर्डिनेटर कलीमुल्लाह फैजी ने ज्ञापन सौंपने के दौरान कहा कि मदरसों को महज किसी एक समुदाय विशेष से जोड़कर देखना अनुचित है।

  • ऐतिहासिक और शैक्षिक योगदान: देश में आधुनिक सरकारी शिक्षण संस्थानों की कमी के दौर में मदरसों ने साक्षरता और शिक्षा के प्रसार में अहम भूमिका निभाई है।

  • विद्वानों का निर्माण: आजादी से पहले और बाद में मदरसों ने कई विद्वानों और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों को देश को दिया है।

  • निष्पक्ष मूल्यांकन की जरूरत: मदरसों को केवल संदेह की दृष्टि से देखने के बजाय उनके वास्तविक योगदान का मूल्यांकन होना चाहिए।

ज्ञापन में उठाई गईं प्रमुख मांगें

  1. ध्वस्तीकरण से पहले जांच और पक्ष रखने का मौका: किसी भी मदरसे को अवैध घोषित करने या उस पर ध्वस्तीकरण (बुलडोजर) की कार्रवाई करने से पहले उसकी मान्यता, भूमि के दस्तावेज और वर्षों से संचालन के तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जाए। प्रबंधन को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए।

  2. सरकारी भूमि पर बने संस्थानों को मिले विकल्प: यदि कोई शैक्षणिक संस्थान या मदरसा सरकारी भूमि पर संचालित पाया जाता है, तो शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उसे सीधे ध्वस्त करने के बजाय:

    • वैकल्पिक सरकारी भूमि उपलब्ध कराई जाए, या

    • प्रबंधन से सहमति बनाकर उचित भूमि या उसके मूल्य की व्यवस्था की जाए।

  3. बच्चों की पढ़ाई न हो बाधित: जिन मदरसों में बच्चे पढ़ रहे हैं, उन्हें अचानक ध्वस्त करने से पहले वैकल्पिक भवन या स्थान उपलब्ध कराया जाए ताकि विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य अंधकारमय न हो।

  4. नियम उल्लंघन पर सुधार और नियमितीकरण का अवसर: यदि निर्माण में किसी नियम का उल्लंघन पाया जाता है, तो पहले नियमानुसार सुधार या नियमितीकरण का मौका मिलना चाहिए। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई केवल अंतिम विकल्प के रूप में ही अपनाई जानी चाहिए।

  5. धार्मिक पहचान नहीं, शैक्षिक गुणवत्ता बने आधार: मदरसों पर किसी भी कार्रवाई का आधार उनकी धार्मिक पहचान या नाम नहीं, बल्कि शैक्षिक गुणवत्ता, पाठ्यक्रम और विद्यार्थियों का हित होना चाहिए।

राज्यपाल से सहानुभूतिपूर्वक विचार की अपील

पीस पार्टी ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल से इन सभी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है।