जमीन में धोखा और कर्ज का जाल: सिद्धार्थनगर के बेकरी कारोबारी का नासिक में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला शव, मौत से पहले बनाए 4 भावुक वीडियो
📅 Published on: October 7, 2026
घटनास्थल: संगम नगर, पंचवटी थाना क्षेत्र, नासिक (महाराष्ट्र)।
मुख्य वजह: जमीन सौदे में धोखाधड़ी, बैंक लोन न मिलना और ब्याज का अत्यधिक दबाव।
पुलिस कार्रवाई: नासिक पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा, मोबाइल वीडियो के आधार पर जांच जारी।
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सिद्धार्थनगर / नासिक: कर्ज के दलदल और जमीन सौदे में मिले धोखे ने एक और हंसते-खेलते परिवार को तबाह कर दिया। सिद्धार्थनगर जिले के भवानीगंज थाना क्षेत्र के श्यामपुर निवासी बेकरी कारोबारी राम अवतार (पुत्र रामपति) का महाराष्ट्र के नासिक में संदिग्ध परिस्थितियों में शव मिला है। मौत से ठीक पहले उन्होंने अपने मोबाइल में चार वीडियो रिकॉर्ड किए, जिसमें उन्होंने भारी कर्ज, ब्याज का बढ़ता दबाव और जमीन के सौदे में हुई धोखाधड़ी की व्यथा बयां की है।
सूचना पर पहुंची नासिक पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मोबाइल में दर्ज वीडियो के आधार पर मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।
गाँव की जमीन बेचकर नासिक में शुरू किया था बेकरी का कारोबार
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भवानीगंज थाना क्षेत्र के ग्राम श्यामपुर निवासी राम अवतार पिछले कई वर्षों से महाराष्ट्र के नासिक जिले के पंचवटी थाना अंतर्गत संगम नगर में रहकर बेकरी की दुकान चलाते थे। उन्होंने अपने गाँव की पैतृक जमीन और मकान बेचकर नासिक में कारोबार खड़ा किया था।
राम अवतार की दो शादियां हुई थीं। पहली पत्नी की कुछ वर्ष पूर्व मृत्यु हो चुकी है, जिनसे उनके तीन बच्चे हैं जो अलग रहते हैं। वहीं दूसरी पत्नी से उनकी एक बेटी है, जिसकी जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर थी।
जमीन के नाम पर धोखा और बैंक लोन न मिलना बना बर्बादी का कारण
मौत से पहले बनाए गए वीडियो में राम अवतार ने अपनी आर्थिक तंगी का पूरा सच उजागर किया है। उन्होंने बताया कि:
ब्याज पर खरीदी थी जमीन: उन्होंने नासिक में ब्याज पर पैसे लेकर एक जमीन खरीदी थी।
डूबा पूरा पैसा: आवश्यक कागजात न मिलने और कतिपय तकनीकी कारणों के चलते उस जमीन पर बैंक से लोन नहीं मिल सका, जिससे उनका पूरा पैसा डूब गया और वे धोखाधड़ी का शिकार हो गए।
व्यापार पर पड़ा बुरा असर: जमीन का पैसा डूबने के बाद उन पर कर्ज का बोझ दिन-ब-दिन बढ़ता चला गया। बेकरी से होने वाली रोजाना की कमाई का अधिकांश हिस्सा केवल ब्याज चुकाने में चला जाता था, जिससे कारोबार पूरी तरह ठप्प होने की कगार पर पहुंच गया था।


