📅 Published on: October 9, 2026
Kapilvastupost
सिद्धार्थनगर। फर्जी अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र के सहारे शिक्षिका की नौकरी हासिल करने वाली प्रधानाध्यापिका सुनैना गौड़ पर बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) शैलेश कुमार ने बड़ा एक्शन लेते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया है। आरोपी शिक्षिका प्राथमिक विद्यालय उटियां (ब्लॉक उस्का बाजार) में तैनात थीं। सेवा समाप्ति के साथ ही फर्जीवाड़े की अवधि के दौरान उठाए गए वेतन की रिकवरी और मानव संपदा पोर्टल पर कार्रवाई दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
2010 में एसटी कोटे से हुई थी नियुक्ति
सुगही, उस्का बाजार निवासी सुनैना गौड़ (पुत्री रामचरन) को 30 जुलाई 2010 को प्राथमिक विद्यालय पल्हया में एसटी (अनुसूचित जनजाति) कोटे के तहत सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति मिली थी। इसके बाद वे पदोन्नत होकर प्राथमिक विद्यालय उटियां में बतौर प्रधानाध्यापिका कार्यरत थीं।
शिकायत और जांच में खुला फर्जीवाड़ा
बरदहा निवासी शिवम सिंह ने शिक्षिका के जाति प्रमाण पत्र को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद तहसीलदार नौगढ़ (29 मार्च 2025) और सतर्कता समिति (08 जून 2026) ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित जनपदस्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति की बैठक (07 जुलाई 2026) में नन्दलाल गौड़ और उनके परिजनों के सभी एसटी प्रमाण पत्रों को निरस्त कर दिया गया, जिसमें सुनैना गौड़ का प्रमाण पत्र भी शामिल था।
स्पष्टीकरण नाकाफी, 7 जुलाई 2026 की तिथि से सेवा समाप्त
प्रमाण पत्र निरस्त होने के बाद बीएसए कार्यालय द्वारा शिक्षिका को तीन बार नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। 29 सितंबर को शिक्षिका ने हाईकोर्ट में रिट दाखिल करने का तर्क दिया, लेकिन जाति प्रमाण पत्र रद्द होने के कारण आरक्षण का लाभ शून्य हो चुका था।
बीएसए शैलेश कुमार ने 7 जुलाई 2026 (प्रमाण पत्र निरस्त होने की तिथि) से ही सुनैना गौड़ की सेवा समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया। इसके साथ ही वित्त एवं लेखाधिकारी तथा खंड शिक्षा अधिकारी को इस तिथि के बाद भुगतान किए गए वेतन की रिकवरी करने और रिकॉर्ड अपडेट करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।