📅 Published on: November 4, 2026
कपिलवस्तुपोस्ट
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद से एक बड़ी और सख्त कार्रवाई का मामला सामने आया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) शैलेश कुमार ने फर्जी अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने वाली शिक्षिका सुनैना गौड़ के बर्खास्तगी आदेश में एक बड़ा संशोधन करते हुए कठोर कदम उठाया है। शिक्षिका वर्तमान में उसका बाजार विकास खंड क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय उठिया में कार्यरत थीं।
आदेश की मुख्य बातें:
सेवा समाप्ति की तिथि में संशोधन: बीएसए द्वारा जारी संशोधित आदेश के अनुसार, शिक्षिका सुनैना गौड़ की सेवा अब दिनांक 30 जुलाई 2010 (उनकी नियुक्ति की तिथि) से ही समाप्त/बर्खास्त मानी जाएगी।
वेतन की होगी संपूर्ण रिकवरी: शिक्षिका को नियुक्ति तिथि 30 जुलाई 2010 से लेकर अब तक प्राप्त हुए संपूर्ण वेतन की धनराशि उनके खाते से वसूल (रिकवरी) करने का आदेश वित्त एवं लेखाधिकारी (बेसिक शिक्षा) को दिया गया है।
दर्ज होगी एफआईआर (FIR): संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी को यह स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे शिक्षिका के खिलाफ संबंधित थाने में तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराना सुनिश्चित करें।
मानव संपदा पोर्टल पर प्रविष्टि: बीएसए शैलेश कुमार ने आदेश की प्रति भेजते हुए मानव संपदा पोर्टल पर इस कार्रवाई का विवरण दर्ज करने और विभागीय कार्यवाही आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
पृष्ठभूमि और अन्य मामले:
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जनपद सिद्धार्थनगर में पिछले दो वर्षों में लगभग दो सौ फर्जी शिक्षकों पर प्रशासन द्वारा कार्रवाई की जा चुकी है। इस प्रकार के मामलों को देखते हुए जनता और जानकारों का मानना है कि वर्ष 2000 के बाद से हुई अन्य नियुक्तियों की भी नए सिरे से उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। इससे पहले भी फर्जीवाड़े से जुड़ी खबरें सामने आ चुकी हैं, जिनमें फेल अभ्यर्थियों को नौकरी मिलने जैसे गंभीर मामले उजागर हुए थे।