गर्मी के मौसम में पशुओं को खुले में न छोड़ें पानी की न होने दें कमी

नबी हुसैन अंसारी

गर्मी में रखें पशुओं का विशेष ध्यान गर्मी के मौसम में पशुओं के बचाव के लिए अत्यधिक सावधानी पशुपालको को बरतनी चाहिए। पशुओं को खुले आसमान के नीचे दिन में नहीं रखना चाहिए क्योंकि अत्यधिक गर्मी के कारण उनको लू लग सकती है, गर्मी के कारण स्ट्रेस यानी व्याकुलता हो सकती है। हमेशा पशुओं को छायादार स्थान या ठंडे जगह पर ही बांधना चाहिए।

पशुओं को समय-समय पर पानी पिलाते रहना चाहिए,जिससे उनके शरीर के अंदर पानी की कमी ना हो पाए। पानी की कमी होने से पशुओं में दस्त, डीहाइड्रेशन इत्यादि बीमारियां उत्पन्न होने लगती है। गर्मी के मौसम में पशुओं के पेट में कीड़े पड़ जाते हैं, उनके शरीर पर टिक्स,   कीटकी, किलनी इत्यादि लग जाती है।

उसके बचाव के लिए पशुओं को कृमि नाशक दवा पिला देना चाहिए। पशुशाला के आसपास हमेशा पानी का छिड़काव करते रहना चाहिए जिससे वहां का वातावरण ठंडा बना रहे।

तेज धूप से काम करके आए पशुओं को तुरंत पानी नहीं पिलाना चाहिए आधे घंटे बाद ही पानी पिलाना चाहिए। गर्मी के मौसम में हरे चारे की कमी हो जाती है अतः गर्मी के मौसम में हरा चारा देने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि वह चारा कहीं विषाक्त तो नहीं है।

क्योंकि पानी की कमी के कारण सामान्य रूप से पूरी तरह से ना बढ़ पाए जहरीले चारे को खा लेने से विषाक्तता उत्पन्न हो सकती है। गर्मी के मौसम में बरसीम का चारा बुवाई करके उसको पशुओं को खिलाना चाहिए।

पशुओं को सुबह और शाम दोनो टाइम नहलाने का प्रयास करें जिससे उनका शरीर ठंडा बना रहे । पशुओं को नमक का भी सेवन करवाते रहना चाहिए। इसी समय खुरपका मुंहपका तथा गला घोट एवं लंगडी बुखार इत्यादि का टीका भी सरकारी अस्पताल से अवश्य लगवा लेना चाहिए। गर्मी के मौसम में पशुओं के बीमार होने पर अपने नजदीक पशु अस्पताल पर संपर्क करें।

उक्त जानकारी पशुधन प्रसार अधिकारी अरुण कुमार प्रजापति ने दी।