बाबा साहब के बताए मार्ग पर चलने से ही होगा समाज और देश का भला – रवि अग्रवाल

निजाम अंसारी

भारत रत्न बाबा साहब भीम राव अंबेडकर संविधान सभा के अध्यक्ष की 132 वीं पुण्यतिथि पर देशभर में उनके चाहने वालों उनके अनुयायियों द्वारा कस्बा शोहरतगढ़ में उनको याद किया गया । बाबा साहब की पुण्य तिथि पर पैदल मार्च कर सोभा यात्रा भी निकाली गई ।

इस दौरान बच्चों और बड़ों ने बाबा साहब के नारे लगाए और नमो बुद्धाय के झंडे लहराए गए।

इस दौरान बाबा साहब के तैल चित्र पर माल्यार्पण के बाद कस्बे के प्रमुख व्यवसाई समाजसेवी ए नेता रवि अग्रवाल ने कहा
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, भीम राव अंबेडकर ने धार्मिक और सामाजिक एकता की महत्ता को समझते हुए उन दोनों के लिए संघर्ष किया।

उन्होंने धर्म को एक अनुचित ज़रिया माना था जो समाज को बाँटने के लिए उत्प्रेरित करता है। वे धर्मनिरपेक्षता के महत्व को समझते थे और इसे संविधान के मूल तत्त्वों में सम्मिलित करने का समर्थन करते थे।

भीम राव अंबेडकर ने सामाजिक एकता और समरसता को बढ़ावा देने के लिए अपनी ज़िम्मेदारी उठाई। उन्होंने दलितों और आदिवासियों के लिए संविधान में अधिकार वाकई सुरक्षित किए हैं, जो उन्हें समाज के मुख्य धार्मिक और सामाजिक संरचनाओं से अलग करते हैं।

उन्होंने समाज में समानता को बढ़ावा देने के लिए अपने समय में बहुत से समाजिक सुधारों की मांग की, जिसमें दलितों और आदिवासियों को उनके मौजूदा स्थान से ऊपर उठाने के लिए समाज में उनके साथ समान व्यवहार करने की मांग शामिल थी।
बाबा साहब को देश के हालात की सही जानकारी थी उन्होंने संविधान के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियां , भ्रष्टाचार असमानता शिक्षा और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए संविधान में लिखकर मजबूती प्रदान की।