सिद्धार्थ नगर – ग्रामीण इलाकों सहित जिले तक बिक रही प्रतिबंधित दवाएं

विनय त्रिपाठी

जनपद में अधिकतर मेडिकल स्टोर पर प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री बिना पर्चे के की जा रही है। युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में है। प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग इस पर नकेल नहीं कस पा रहा है जबकि ये दवाएं बिना डॉक्टर के पर्चे के लोगों को नहीं मिल सकती हैं।

यह गोरख धंधा रेलवे स्टेशन रोड, जिला अस्पताल, और मेडिकल कॉलेज के आसपास के अलावा ग्रामीण क्षेत्र के मेडिकल स्टोरों पर खुलेआम चल रहा है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने करीब 344 दवाओं को प्रतिबंधित कर रखा है। इन दवाओं की बिक्री तभी हो सकेगी, जब मरीज पर्चा लेकर मेडिकल स्टोर पर जाएगा।

जानकारों का कहना है कि यह फिक्स डोज कांबिनेशन (एफडीसी ) वाली दवाएं हैं। एफर्डीसी में दो दवाएं मिक्स होती हैं। इसका इस्तेमाल डॉक्टर मानसिक रोग या फिर दर्द निवारक में करते हैं। जब ज्यादा दर्द होता है, नींद नहीं आती है या फिर मानसिक स्थिति ज्यादा खराब होती है, तभी डॉक्टर लिखते हैं।

इन दवाओं की बिक्री पूरी तरह से पर्चे पर होती है, लेकिन शहर में ये दवाएं बिना पर्चे के मिल रही हैं। बस, उसकी रसीद नहीं मिलती है। मेडिकल स्टोर अधिक पैसा लेकर कमाने के चक्कर में इन दवाओं की बिक्री कर रहे हैं। अगर कोई मेडिकल स्टोर संचालकों से इन दवाओं की रसीद मांगता है तो उसे दवा नहीं मिलती है, उसे लौटा दिया जाता है।

प्रतिबंधित दवाओं में अल्प्राजोलाम, हैलोब्रीड, क्लोट्रिमाजोल, लेवोडोपा, … पेडर्स, .. ग्लूकोनार्म, ल्यूपिडीक्लाक्स, टैक्सीन आदि जैसी दवाएं शामिल हैं। इस बारे में ड्रग इंस्पेक्टर से वार्ता किया गया तो कहते हैं कि कोई दवा प्रतिबंधित नहीं होती है।