ग्राम पंचायत अहिरौला व सिसवा बुजुर्ग में गूंजा चौपाल: “गाँव की समस्या गाँव में समाधान” मुहिम को मिली नयी धार

गुरू जी की कलम से

बढ़नी (सिद्धार्थनगर):
विकास खण्ड बढ़नी के अंतर्गत शुक्रवार को ग्राम पंचायत अहिरौला और सिसवा बुजुर्ग में आयोजित ग्राम चौपाल कार्यक्रमों ने ग्रामीण विकास को नई दिशा देने का कार्य किया। “गाँव की समस्या गाँव में समाधान” अभियान के तहत हुए इन चौपालों में शासन की योजनाओं से ग्रामीणों को जोड़ने और उनके समुचित क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।

सिसवा बुजुर्ग में योजनाओं की बारिश, ग्रामीणों में जागरूकता की बयार

ग्राम पंचायत सिसवा बुजुर्ग में आयोजित चौपाल की अध्यक्षता पंचायत सचिव संजय चौधरी ने की। उन्होंने केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा संचालित महत्वपूर्ण योजनाओं जैसे अटल पेंशन योजना, वृद्धावस्था, विधवा व दिव्यांग पेंशन, आयुष्मान भारत, पीएम आवास योजना, मनरेगा, किसान सम्मान निधि, व्यक्तिगत शौचालय निर्माण सहित रोजगार से जुड़ी पहलुओं पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी।

कार्यक्रम में ग्रामीणों को स्वच्छता, स्वास्थ्य और डिजिटल कार्ड बनवाने के लिए प्रेरित किया गया। उपस्थित लोगों को परिवार कार्ड और आयुष्मान कार्ड की उपयोगिता बताते हुए लाभ लेने के तरीके भी समझाए गए।
इस मौके पर ग्राम प्रधान लाल सिंह चौधरी, पंचायत सहायक अजय कुमार यादव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अनुराधा त्रिपाठी, सुनीता चौधरी, शशि बाला, व अन्य गणमान्य ग्रामीणों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल बनाया।

अहिरौला में भी चौपाल ने ग्रामीणों को किया सशक्त

इसी क्रम में ग्राम पंचायत सिसवा बुजुर्ग में आयोजित चौपाल कार्यक्रम की अध्यक्षता पंचायत सचिव संजय कुमार ने की। उन्होंने जन-धन योजना, मुद्रा योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, तथा अन्य योजनाओं की जानकारी देकर ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।

आरोह फाउंडेशन के AFC अंबुज श्रीवास्तव ने योजनाओं से जुड़ी तकनीकी जानकारी साझा करते हुए बचत खाता, अटल पेंशन योजना और महिला सशक्तिकरण पर बल दिया।

कार्यक्रम में ग्राम प्रधान रविन्द्र कुमार यादव उर्फ लालू यादव, रोजगार सेवक सरिता चौधरी, सफाईकर्मी रामकुमार यादव, पंचायत सहायिका शिवांगी श्रीवास्तव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता माला श्रीवास्तव, समेत बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भागीदारी ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।

बताते चलें कि इन चौपालों ने न केवल योजनाओं की जानकारी दी, बल्कि ग्रामवासियों को उनकी भागीदारी और हक की समझ भी दी। ऐसे आयोजनों से न सिर्फ सरकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ती है, बल्कि विकास की जड़ें भी और गहरी होती हैं।