📅 Published on: June 28, 2025
गुरु जी की कलम से
बढ़नी, सिद्धार्थनगर। नेपाल सीमा से सटे बढ़नी में फर्जी अस्पतालों और मेडिकल स्टोर्स पर लगाम लगाने के लिए जिलाधिकारी का आदेश भी बेअसर साबित हो रहा है। जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर राजा गणपति रामास्वामी ने स्वास्थ्य, राजस्व और पुलिस विभाग को सख्त निर्देश दिए थे कि अपने-अपने क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों, फर्जी अस्पतालों और नकली दवाओं पर कार्रवाई सुनिश्चित करें।
मगर जमीनी हकीकत यह है कि बढ़नी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉक्टर अविनाश चौधरी न तो जिलाधिकारी के आदेश को गंभीरता से ले रहे हैं और न ही नगर पंचायत अध्यक्ष के सवालों का जवाब दे रहे हैं। नगर पंचायत अध्यक्ष सुनील अग्रहरि ने महीनों पहले डॉक्टर चौधरी को पत्र भेजकर यह पूछा था कि नगर पंचायत क्षेत्र में कितने अस्पताल संचालित हैं और वहां कार्यरत डॉक्टरों की डिग्रियां कितनी प्रमाणिक हैं?
लेकिन हैरत की बात यह है कि कई महीने बीत जाने के बावजूद भी डॉक्टर चौधरी ने कोई जवाब नहीं दिया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पूरे क्षेत्र में फर्जी डॉक्टर खुलेआम मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। इलाज के नाम पर मौत बेची जा रही है और नकली दवाइयों का व्यापार धड़ल्ले से जारी है। लोग कहते हैं कि दाल में काला नहीं, पूरी दाल ही काली है।
इसी कड़ी में एक और बड़ा सवाल उठ रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने 12 जून 2025 को बढ़नी स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉक्टर चौधरी को निर्देशित किया था कि डॉक्टर निवेदिता यादव को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इटवा के लिए कार्यमुक्त किया जाए। मगर प्रभारी डॉक्टर ने न सिर्फ इस आदेश की अनदेखी की बल्कि अब तक डॉक्टर निवेदिता को कार्यमुक्त भी नहीं किया। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों के आदेश की इस तरह अवहेलना सीधे अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है, मगर कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा पसरा है।
लोगों की मांग है कि जिलाधिकारी को इस पूरे मामले में संज्ञान लेकर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए ताकि फर्जी अस्पतालों और बेलगाम स्वास्थ्य अधिकारियों पर लगाम लगाई जा सके।