लापरवाही का घातक परिणाम: सिद्धार्थनगर में कुत्ते के काटने के 2 महीने बाद मासूम की मौत, निकालने लगा था कुत्ते जैसी आवाजें

घरेलू उपचार या झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ना जानलेवा साबित हो सकता है।

बिना देरी किए अस्पताल जाकर एंटी-रेबीज वैक्सीन का पूरा कोर्स करवाना चाहिए।

निज़ाम अंसारी
सिद्धार्थनगर (जोगिया): जनपद के जोगिया कोतवाली क्षेत्र के लखनापार गांव में एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक 6 वर्षीय मासूम बच्चे की कुत्ते के काटने से हाइड्रोफोबिया (रेबीज) के लक्षण उभरने के बाद मौत हो गई। बताया जा रहा है कि बच्चा अपनी मौत से कुछ पल पहले कुत्ते की तरह आवाजें निकाल रहा था।
क्या है पूरा मामला?
नेपाल मूल का 6 वर्षीय अनूप अपनी मां के साथ अपने नाना मुरलीधर लोधी के घर लखनापार में रह रहा था। परिजनों के अनुसार, करीब दो महीने पहले अनूप को एक कुत्ते ने काट लिया था। उस समय परिजनों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और उसे एंटी-रेबीज इंजेक्शन (ARV) नहीं लगवाया।

शुक्रवार की रात जब अनूप सो रहा था, तो अचानक वह सोते समय कुत्ते की तरह आवाजें निकालने लगा। जब तक घरवाले कुछ समझ पाते, वह बदहवास होकर घर से बाहर भागा और अचानक गिर पड़ा, जहाँ उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

डॉक्टरों की चेतावनी
इस दुखद घटना पर डॉ. ओ.पी. श्रीवास्तव ने कहा कि कुत्ते के काटने को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि कुत्ते के काटने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए।