सिद्धार्थनगर: खाकी के ‘अहंकार’ पर भारी पड़ी जनता की जिद: ढेबरुआ थानाध्यक्ष को हटाने की मांग पर अड़े सपाई, डीएम के आश्वासन पर पोस्टमॉर्टम पर बनी सहमति

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सिद्धार्थनगर। ढेबरुआ थाना क्षेत्र के तालकुंडा गांव में चुनावी रंजिश और आपसी विवाद के बाद हुई मारपीट में घायल महिला कृष्णावती की मौत के बाद उपजा आक्रोश गुरुवार को शांत हुआ। जिलाधिकारी के हस्तक्षेप और ठोस कार्रवाई के आश्वासन के बाद परिजनों और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने पोस्टमॉर्टम के लिए सहमति दे दी है।

क्या है पूरा मामला?
बीती 8 फरवरी को केवटलिया टोला में दबंगों ने लाल बहादुर चौधरी के परिवार पर लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से हमला किया था। इस हमले में लाल बहादुर की पत्नी कृष्णावती गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। परिजनों का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद जब वे थाने पहुंचे, तो थानाध्यक्ष ने मुकदमा दर्ज करने के बजाय उन्हें टाल दिया। हालत बिगड़ने पर कृष्णावती को मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
पुलिस की लापरवाही पर भड़के सपाई
समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और परिजनों ने पुलिस पर आरोपियों को बचाने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पुलिस ने घटना के दो दिन बाद केवल एनसीआर (NCR) दर्ज की और मुख्य आरोपियों के नाम हटा दिए। इसी मांग को लेकर बुधवार से ही पोस्टमॉर्टम हाउस पर हंगामा चल रहा था। गुरुवार को सपाई और गांव की महिलाओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
प्रशासनिक दखल के बाद सुलझा मामला
सपा जिलाध्यक्ष लालजी यादव और पूर्व विधायक अमर सिंह चौधरी के नेतृत्व में चल रहे प्रदर्शन को देखते हुए जिलाधिकारी (DM) ने आंदोलनकारियों से वार्ता की। डीएम ने आश्वासन दिया कि पुलिस अधीक्षक (SP) के वापस लौटते ही थानाध्यक्ष के निलंबन और दोषियों की गिरफ्तारी पर ठोस चर्चा की जाएगी। इस भरोसे के बाद परिजनों ने धरना समाप्त कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा।

इस दौरान लालाजी यादव , इदरीस राईनी, जमील सिद्दीकी , डॉ धीरेन्द्र यादव ,  कमरुज्जमा खान, उग्रसेन सिंह और राम मिलन भारती सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।